उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव अभी करीब एक साल दूर हैं, लेकिन सियासी हलचल अभी से ही तेज होने लगी है. इसी बीच सामने आए एक मीडिया चैनल के सर्वे ने भाजपा और कांग्रेस के बीच संभावित मुकाबले को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है. सर्वे में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भाजपा को 54 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है, जबकि कांग्रेस को 14 सीटें मिलने की बात कही गई है. अगर यह अनुमान नतीजों में बदलता है, तो भाजपा 2022 के प्रदर्शन से आगे निकल सकती है.
सर्वे में अलग-अलग आयु वर्गों के बीच धामी की स्वीकार्यता का दावा किया गया है. 18-25 वर्ष के लोगों में उन्हें 37.8 प्रतिशत समर्थन बताया गया है. 26-35 आयु वर्ग में यह आंकड़ा 43, 36-50 में 46.8, 51-60 में 50.3 और 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में 51.8 प्रतिशत बताया गया है. इससे भाजपा को युवा से लेकर बुजुर्ग मतदाताओं तक समर्थन मिलने का संकेत माना जा रहा है.
जातीय और सामाजिक समूहों के आंकड़ों में भी मुख्यमंत्री को अच्छा समर्थन मिलने का दावा किया गया है. वैश्य वर्ग में 57.3 प्रतिशत, OBC में 50.6, पंजाबी-सिख समुदाय में 49.7, ब्राह्मणों में 46.3, राजपूतों में 46.1 और अनुसूचित जाति वर्ग में 45.3 प्रतिशत समर्थन बताया गया है. भाजपा के लिए ये आंकड़े सामाजिक आधार को व्यापक करने की उसकी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकते हैं.
सर्वे में महिला आरक्षण को लेकर धामी सरकार के फैसले को 88 प्रतिशत लोगों का पूर्ण समर्थन मिलने का दावा किया गया है. वहीं देवभूमि की पहचान और मूल स्वरूप को बचाने के प्रयासों के साथ 70 प्रतिशत जनता के खड़े होने की बात कही गई है. समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून, महिला सशक्तीकरण, विकास और सुशासन जैसे मुद्दों को भी सरकार की स्वीकार्यता से जोड़कर देखा गया है.
सर्वे के आंकड़े भाजपा के लिए उत्साह बढ़ाने वाले हैं, लेकिन चुनाव अभी दूर है. मौजूदा जनमत पर आधारित ऐसे अनुमानों में समय के साथ बदलाव संभव है. कांग्रेस के सामने अब सरकार के खिलाफ माहौल बनाने और इस अनुमान को गलत साबित करने की चुनौती होगी. दूसरी ओर भाजपा इन आंकड़ों को 2027 की तैयारी में अपने पक्ष के संकेत के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है. अंतिम तस्वीर चुनाव और मतगणना के बाद ही साफ होगी.