दिवाली पर घरों में रोशनी और खुशियों के साथ पटाखे खरीदने की तैयारी भी शुरू हो जाती है. लेकिन दिल्ली-NCR में इस बार पटाखे खरीदते समय थोड़ी सावधानी जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत केवल निर्धारित मानकों पर खरे उतरने वाले प्रमाणित ग्रीन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल की अनुमति है. ऐसे में बाजार में किसी पटाखे को ग्रीन बताकर बेचे जाने पर उसकी पहचान करना जरूरी हो जाता है.
पटाखों की पैकिंग पर हरा लोगो या QR कोड देखकर तुरंत भरोसा न करें. असली ग्रीन पटाखे की पहचान के लिए पैकेट पर दिए गए QR कोड को स्कैन कर उसकी जानकारी जांची जा सकती है. इससे खरीदारी के दौरान धोखाधड़ी से बचने में मदद मिल सकती है.
ग्रीन पटाखे ऐसे पटाखे हैं जिन्हें सामान्य पटाखों के मुकाबले कम प्रदूषण फैलाने के उद्देश्य से तैयार किया जाता है. इनमें कुछ हानिकारक रसायनों और उत्सर्जन को कम करने पर ध्यान दिया जाता है. CSIR-NEERI ने इनके लिए SWAS, SAFAL और STAR जैसी श्रेणियां तय की हैं. इनका उद्देश्य पटाखों से निकलने वाले धुएं और हानिकारक उत्सर्जन को कम करना है.
पटाखे के पैकेट पर दिए QR कोड को स्कैन करने के बाद निर्माता का नाम, CSIR-NEERI का रजिस्ट्रेशन नंबर, PESO लाइसेंस, उत्पाद का बैच नंबर और टेस्ट सर्टिफिकेट जैसी जानकारियां जांचें. इन विवरणों से पटाखे की कंपनी, प्रमाणन और सुरक्षा मंजूरी से जुड़ी जानकारी मिल सकती है. QR कोड से मिली जानकारी को पैकेट पर छपी जानकारी से भी जरूर मिलाएं.
पटाखे खरीदते समय केवल हरे रंग का लोगो या QR कोड होना प्रमाणिकता की गारंटी नहीं है. हमेशा अधिकृत और लाइसेंस प्राप्त दुकानदार से ही पटाखे खरीदें. पैकेट की सील और पैकिंग जांचें. खुला या छेड़छाड़ किया हुआ पैकेट लेने से बचें. खरीदारी के बाद दुकानदार से पक्का बिल जरूर लें, ताकि जरूरत पड़ने पर खरीद का प्रमाण मौजूद रहे.
ग्रीन पटाखों को कम प्रदूषण फैलाने के उद्देश्य से बनाया जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे पूरी तरह प्रदूषण मुक्त हैं. इसलिए पटाखे खरीदने और इस्तेमाल करने से पहले उनकी प्रमाणिकता जांचें. इस्तेमाल के दौरान बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें. सावधानी के साथ त्योहार मनाना ही खुशियों को सुरक्षित रखने का बेहतर तरीका है.