नई दिल्ली: नौकरी बदली, पुराना PF निकाला और मन में सुकून आ गया कि अब पुराने खाते से कोई वास्ता नहीं रहा. बहुत से कर्मचारी ठीक यही सोचते हैं. कर्मचारी भविष्य निधि यानी EPF नौकरीपेशा लोगों की रिटायरमेंट की सबसे बड़ी बचत मानी जाती है. लेकिन अगर आपके खाते में कर्मचारी पेंशन योजना यानी EPS की सर्विस हिस्ट्री दर्ज है, तो उसे नजरअंदाज करना भविष्य में बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है.
सवाल यह है कि EPS का रिकॉर्ड इतना अहम क्यों है, और पैसा निकाल लेने के बाद क्या किया जा सकता है. इसका जवाब पेंशन की शर्तों में छिपा है. पुरानी नौकरी की सेवा अवधि अगर नए रिकॉर्ड में नहीं जुड़ी, तो आपकी कुल सेवा कागजों पर कम दिख सकती है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि पूरा मामला क्या है और इसे कैसे सुलझाया जाए.
EPF और EPS एक ही सोशल सिक्योरिटी व्यवस्था का हिस्सा हैं, मगर दोनों का काम जुदा है. EPF में जमा रकम और उस पर मिला ब्याज रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड तैयार करता है. वहीं EPS में आपकी पेंशन योग्य सेवा अवधि का हिसाब रखा जाता है. यह अवधि जितनी लंबी होगी, पेंशन लाभ के लिहाज से उतना ही फायदा मिल सकता है.
PF का बैलेंस निकाल लेने का मतलब यह नहीं कि आपकी EPS सर्विस अपने आप नई नौकरी के रिकॉर्ड से जुड़ गई. पेंशन में कुल योग्य सेवा अवधि सबसे अहम होती है. आम तौर पर मासिक पेंशन की पात्रता के लिए कम से कम 10 साल की योग्य सेवा जरूरी है. पुरानी नौकरी का रिकॉर्ड न जुड़ा, तो आपकी कुल अवधि घटी हुई दिख सकती है.
अच्छी खबर यह है कि PF निकाल चुके लोगों के लिए भी रास्ता बंद नहीं हुआ है. ऐसे मामलों में भी EPS ट्रांसफर कराया जा सकता है. इसके लिए EPFO के मेंबर पोर्टल पर Form 13 जमा करना होता है. इसी के जरिए पुरानी पेंशन योग्य सेवा को नए रिकॉर्ड के साथ जोड़ा जाता है.
ट्रांसफर में सबसे ज्यादा रुकावट गलत जानकारी से आती है. व्यक्तिगत ब्योरे, UAN या KYC डिटेल में चूक, या पुराने नियोक्ता के रिकॉर्ड में गलत Date of Exit आवेदन अटका सकती है. इसलिए आवेदन से पहले सब कुछ जांच लें. तारीख गलत हो तो पहले पुराने नियोक्ता से सुधरवाएं. कुछ मामलों में आप इसे पोर्टल पर खुद भी अपडेट कर सकते हैं.
सबसे पहले UAN और पासवर्ड से EPFO के आधिकारिक मेंबर पोर्टल पर लॉगिन करें. होम पेज के Manage टैब में जाकर Mark Exit चुनें. नौकरी छोड़ने का सही कारण भरें और आधिकारिक रिकॉर्ड व आखिरी PF योगदान वाले महीने के हिसाब से तारीख दर्ज करें. अंत में आधार आधारित OTP वेरिफिकेशन पूरा कर रिक्वेस्ट सबमिट कर दें.