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Explainer: कहीं आपके बैंक खाते से भी तो नहीं कट रहे पैसे? इन छिपे चार्जेस से ऐसे बचाएं अपनी मेहनत की कमाई

सेविंग्स अकाउंट में MAB, ATM ट्रांजैक्शन, डेबिट कार्ड और SMS अलर्ट जैसे शुल्क आपकी बचत को कम कर सकते हैं. जरूरत से ज्यादा खाते रखने से भी बचना चाहिए.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
Explainer: कहीं आपके बैंक खाते से भी तो नहीं कट रहे पैसे? इन छिपे चार्जेस से ऐसे बचाएं अपनी मेहनत की कमाई
Courtesy: Pinterest

सेविंग्स अकाउंट में पैसा रखना सुरक्षित और आसान माना जाता है, लेकिन कई बार छोटी-छोटी बैंकिंग फीस आपकी बचत को धीरे-धीरे कम कर सकती हैं. न्यूनतम औसत बैलेंस यानी MAB, ATM ट्रांजैक्शन, डेबिट कार्ड, SMS अलर्ट और दूसरी बैंकिंग सेवाओं के लिए लगने वाले शुल्क का ध्यान रखना जरूरी है. अगर इन चार्जेस की जानकारी पहले से हो, तो अनावश्यक कटौती से बचा जा सकता है.

सेविंग्स अकाउंट चुनते समय केवल बैंक का नाम या ब्याज दर देखकर फैसला नहीं करना चाहिए. यह भी देखना जरूरी है कि खाते में न्यूनतम बैलेंस रखना अनिवार्य है या नहीं. इसके अलावा ATM, डेबिट कार्ड, SMS अलर्ट और दूसरी सेवाओं के लिए बैंक कितना शुल्क लेता है, इसकी जानकारी भी लेनी चाहिए.

न्यूनतम बैलेंस की बाध्यता

जिन ग्राहकों को न्यूनतम बैलेंस की बाध्यता से बचना है, उनके लिए BSBD यानी Basic Savings Bank Deposit Account एक विकल्प हो सकता है. RBI के नियमों के तहत इस तरह के खाते में निर्धारित बुनियादी सुविधाएं न्यूनतम बैलेंस की शर्त के बिना उपलब्ध कराई जाती हैं.

MAB की शर्त को समझना जरूरी

अगर आपके सेविंग्स अकाउंट में MAB बनाए रखने की शर्त है, तो पूरे महीने खाते के बैलेंस पर नजर रखें. केवल महीने के आखिरी दिन पर्याप्त रकम रखना हमेशा पर्याप्त नहीं होता, क्योंकि बैंक औसत बैलेंस के आधार पर गणना कर सकता है. इसलिए बड़ी रकम निकालने या खाते में बैलेंस काफी कम करने से पहले अपने बैंक की MAB की शर्त और उससे जुड़े शुल्क जरूर जांच लें. बैंक से मिलने वाली चार्ज लिस्ट में इसकी जानकारी देखी जा सकती है.

ATM और डेबिट कार्ड पर भी लग सकता है शुल्क

ATM से तय मुफ्त ट्रांजैक्शन की सीमा पार करने पर अतिरिक्त शुल्क लग सकता है. इसी तरह डेबिट कार्ड के लिए सालाना शुल्क भी बैंक और कार्ड के प्रकार के अनुसार अलग-अलग हो सकता है. अगर आपके पास ऐसा डेबिट कार्ड है जिसका इस्तेमाल बहुत कम होता है, तो उसके सालाना शुल्क की समीक्षा करना जरूरी है. इसी तरह SMS अलर्ट जैसी सेवाओं पर लगने वाले शुल्क की जानकारी भी बैंक के Schedule of Charges में देखी जा सकती है.

बचत खाते में जरूरत से ज्यादा पैसा न रखें

अगर बचत खाते में रोजमर्रा की जरूरत से बहुत ज्यादा रकम लंबे समय तक पड़ी रहती है, तो उस पैसे से बेहतर रिटर्न पाने का मौका छूट सकता है. ऐसे में बैंक की स्वीप-इन या फ्लेक्सी डिपॉजिट सुविधा के बारे में जानकारी ली जा सकती है. इस सुविधा में निर्धारित सीमा से अधिक रकम को FD जैसे विकल्प में ट्रांसफर किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर रकम वापस उपलब्ध हो सकती है. हालांकि सुविधा लेने से पहले बैंक के नियम और लागू शर्तों को समझना जरूरी है.

पुराने बैंक खातों की करें समीक्षा

नौकरी, कॉलेज या शहर बदलने के बाद कई लोगों के पुराने सैलरी या सेविंग्स अकाउंट इस्तेमाल में नहीं रहते. ऐसे खातों को लंबे समय तक नजरअंदाज करने के बजाय उनकी स्थिति और लागू शुल्क की जांच करनी चाहिए. अगर किसी खाते की जरूरत नहीं है, तो बैंक की प्रक्रिया के अनुसार उसे बंद किया जा सकता है. RBI के अनुसार ग्राहक की ओर से दो साल तक कोई लेनदेन नहीं होने पर खाते को डोरमेंट श्रेणी में रखा जा सकता है.

तीन खातों का तरीका हो सकता है उपयोगी

कई बैंक खाते रखने वाले लोग पैसों को अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से व्यवस्थित कर सकते हैं. उदाहरण के लिए एक खाते का इस्तेमाल सैलरी और जरूरी भुगतान के लिए, दूसरे का रोजमर्रा के खर्च के लिए और तीसरे का आपातकालीन बचत के लिए किया जा सकता है. हालांकि बहुत ज्यादा बैंक खाते रखना भी परेशानी पैदा कर सकता है. अलग-अलग खातों की MAB शर्त, डेबिट कार्ड फीस और अन्य शुल्क को ट्रैक करना मुश्किल हो सकता है. इसलिए उतने ही खाते रखें जिन्हें आसानी से मैनेज किया जा सके.

इन तरीकों से बचाएं अपनी बचत

  • अपने बैंक की लेटेस्ट Schedule of Charges जरूर पढ़ें.
  • MAB की शर्त और बैलेंस कम होने पर लगने वाली फीस समझें.
  • पुराने और इस्तेमाल न होने वाले खातों की समीक्षा करें.
  • जहां संभव हो, ई-स्टेटमेंट का इस्तेमाल करें.
  • डेबिट कार्ड की सालाना फीस की जांच करें.
  • ATM की मुफ्त ट्रांजैक्शन लिमिट का ध्यान रखें.
  • मोबाइल बैंकिंग ऐप से खाते में होने वाली हर कटौती पर नजर रखें.

छोटी-छोटी बैंकिंग फीस को नजरअंदाज करने के बजाय अगर नियमित रूप से खाते की निगरानी की जाए, तो अनावश्यक खर्च को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.