स्मार्टफोन में सबसे पहले खराब होने वाली चीज डिस्प्ले ही होती है. हाथ से छूटकर गिरने या कोने की तरफ गिरने पर स्क्रीन में दरारें आ जाती हैं. ऐसे में कई लोग पैसे बचाने के लिए नया डिस्प्ले लगवाने की जगह टूटी स्क्रीन पर ही टेम्पर्ड ग्लास चिपका देते हैं. उन्हें लगता है इससे फोन लंबे समय तक चल जाएगा, लेकिन यह सोच आगे चलकर भारी नुकसान की वजह बन सकती है.
टूटी स्क्रीन पर ग्लास लगाने से पहले तो थोड़ी राहत मिलती है, क्योंकि टूटे हुए डिस्प्ले से निकलने वाले नुकीले पार्टिकल्स उंगलियों में चुभने और चोट लगने से बच जाते हैं. लेकिन असली दिक्कत इसके बाद शुरू होती है. ग्लास लगाने के बावजूद स्क्रीन के अंदर मौजूद क्रैक धीरे-धीरे फैलते रहते हैं, जिससे डिस्प्ले समय के साथ और बिगड़ता चला जाता है.
फोन पर ग्लास लग जाने के बाद यूजर्स को लगता है कि अब स्क्रीन पूरी तरह सुरक्षित हो गई है. लेकिन रोजमर्रा के इस्तेमाल में फोन पर पड़ने वाला हल्का सा दबाव भी क्रैक को बड़ा बना सकता है. यही वजह है कि शुरुआत में दिखने वाली एक छोटी सी दरार भी कुछ ही हफ्तों में बड़ी समस्या का रूप ले लेती है.
लगातार टच और प्रेशर पड़ने से टूटे हुए डिस्प्ले की हालत और बिगड़ती जाती है. कई बार किसी खास हिस्से पर ज्यादा दबाव पड़ने से स्क्रीन पर फ्लिकर या ग्रेन जैसी अजीब लाइनें दिखने लगती हैं. धीरे-धीरे फोन का टच रिस्पॉन्स भी सुस्त पड़ जाता है, जिससे रोजमर्रा का इस्तेमाल मुश्किल हो जाता है.
डिस्प्ले में दरार आने के बाद फोन की वाटर रेसिस्टेंस क्षमता भी कमजोर पड़ जाती है. इन्हीं क्रैक के रास्ते नमी और पानी फोन के अंदर पहुंच सकते हैं, जिससे इंटरनल पार्ट्स को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है. कई बार यही लापरवाही फोन को पूरी तरह खराब कर देती है, इसलिए स्क्रीन ज्यादा टूटने पर तुरंत सर्विस सेंटर जाना ही समझदारी है. थोड़े से पैसे बचाने के चक्कर में आपको भारी नुकसान नहीं करना चाहिए.