नई दिल्ली: कुछ साल इस्तेमाल करने के बाद ज्यादातर स्मार्टफोन पहले जैसी स्पीड से काम नहीं करते. ऐप खुलने में देर लगती है, फोन हैंग होता है और बैटरी जल्दी खत्म हो जाती है. ऐसे में लोगों को लगता है कि कंपनियां जानबूझकर फोन को स्लो कर देती हैं, लेकिन असली वजह कुछ और ही होती है. बहुत से लोग सोचते हैं कि कंपनियां नए फोन बेचने के लिए पुराने फोन को अपडेट के जरिए धीमा कर देती हैं.
हालांकि, सच्चाई यह है कि सॉफ्टवेयर अपडेट का मुख्य काम नए फीचर्स देना, सिक्योरिटी बढ़ाना और बग्स को ठीक करना होता है. नए अपडेट पहले के मुकाबले ज्यादा भारी होते हैं और ज्यादा रैम व प्रोसेसिंग पावर लेते हैं. इसलिए पुराने फोन में यह थोड़ा स्लो महसूस हो सकता है, लेकिन यह जानबूझकर नहीं किया जाता.
हर स्मार्टफोन का हार्डवेयर समय के साथ पुराना हो जाता है. प्रोसेसर, रैम और स्टोरेज की लिमिट होती है. आज की ऐप्स पहले से ज्यादा एडवांस और भारी हो गए हैं. ऐसे में पुराने फोन उन्हें ठीक से संभाल नहीं पाते और फोन की स्पीड कम हो जाती है. यही वजह है कि नया फोन तेज लगता है और पुराना धीमा.
समय के साथ फोन की बैटरी कमजोर हो जाती है. जब बैटरी पुरानी हो जाती है, तो फोन खुद ही प्रोसेसर की स्पीड कम कर देता है ताकि फोन अचानक बंद न हो. इस वजह से फोन स्लो लगने लगता है. कई बार सिर्फ बैटरी बदलने से ही फोन की परफॉर्मेंस काफी बेहतर हो जाती है.
अगर आपके फोन की स्टोरेज लगभग भर चुकी है, तो यह भी स्लो होने का बड़ा कारण है. इसके अलावा बैकग्राउंड में चलने वाले ऐप्स, बड़ी फोटो और वीडियो और ज्यादा कैश डाटा भी इसके कारण होते हैं. ये सभी फोन की स्पीड कम कर देते हैं. आज के ऐप्स ज्यादा डेटा इस्तेमाल करते हैं, इसलिए पुराने फोन पर ज्यादा असर पड़ता है.
अनावश्यक ऐप्स डिलीट करें
स्टोरेज खाली रखें
कैश डेटा साफ करें
बैकग्राउंड ऐप्स बंद करें
जरूरत पड़े तो बैटरी बदलें
केवल जरूरी अपडेट ही इंस्टॉल करें
हर बार फोन स्लो होने का मतलब यह नहीं कि आपको नया फोन खरीदना पड़े. अगर आपका फोन ज्यादा पुराना नहीं है, तो सही देखभाल और स्टोरेज मैनेजमेंट से वह लंबे समय तक ठीक चल सकता है. लेकिन अगर फोन बहुत पुराना हो चुका है और नए ऐप्स या अपडेट सही से काम नहीं कर रहे, तो नया फोन लेना बेहतर विकल्प हो सकता है.