नई दिल्ली: आजकल हर घर में टीवी, मोबाइल, लैपटॉप, वॉशिंग मशीन, माइक्रोवेव जैसी कई इलेक्ट्रॉनिक चीजें होती हैं. इन सब पर एक पावर सिंबल बना होता है. यह एक सर्कल के अंदर ऊपर से नीचे जाती हुई एक सीधी लाइन वाला छोटा निशान होता है. ज्यादातर लोग इसे सिर्फ ऑन-ऑफ बटन समझते हैं, लेकिन इसका असली मतलब और इतिहास बहुत दिलचस्प है.
यह निशान दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाला एक यूनिवर्सल सिंबल है. चाहे कोई भी भाषा बोलने वाला व्यक्ति हो, यह देखते ही समझ जाता है कि यह बटन डिवाइस को चालू या बंद करने के लिए है. इसका डिजाइन तो आप सभी ने देखा ही होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस डिजाइन के पीछे क्या कहानी है, क्योंकि इसे काफी सोच-समझकर बनाया गया था.
यह निशान कंप्यूटर की शुरुआती बाइनरी लैंग्वेज से लिया गया है. बाइनरी में 1 का मतलब On (चालू) और 0 का मतलब Off (बंद) होता है. पावर सिंबल में सीधी लाइन 1 को दर्शाती है और सर्कल 0 को. दोनों को मिलाकर यह संकेत बनाया गया कि यह बटन पावर को कंट्रोल करता है.
1960-70 के दशक में अलग-अलग कंपनियां अपने हिसाब से पावर बटन बनाती थीं. इससे लोगों को नया डिवाइस इस्तेमाल करने में परेशानी होती थी. बाद में इंटरनेशनल स्टेंडर्डाइजेशन बॉडीज ने एक ही तरह का निशान तय करने का फैसला किया. धीरे-धीरे यह निशान दुनिया भर के सभी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का स्टैंडर्ड बन गया.
आधुनिक डिवाइस में पावर बटन सिर्फ चालू-बंद करने का काम नहीं करता. एक बार दबाने पर स्क्रीन चालू होती है, कुछ सेकंड दबाकर रखने पर डिवाइस बंद होता है, लंबे समय तक दबाने पर फोर्स रीस्टार्ट होता है या स्लीप मोड में चला जाता है.
अगर हर कंपनी अपना अलग पावर बटन बनाती तो हर नया डिवाइस सीखना मुश्किल हो जाता. एक ही पावर सिंबल होने से कोई भी व्यक्ति बिना भाषा जाने डिवाइस चला सकता है. यही वजह है कि यह दुनिया का सबसे ज्यादा पहचाना जाने वाला निशान बन गया है. अगली बार जब आप अपने टीवी, फोन या किसी डिवाइस का पावर बटन दबाएं तो याद रखें कि यह सिर्फ एक निशान नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को जोड़ने वाला एक यूनिवर्सल साइन है.