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भारत की राह पर चला EU, बना डाली डिजिलॉकर की कॉपी! जानें कैसे करेगा काम

EU Digital ID Wallet: जिस तरह से भारत में डिजिलॉकर काम करता है ठीक उसी तरह EU Digital ID की शुरुआत की गई है. यह भी लोगों को अपने सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स को सेव रखने में मदद करेगा. साथ ही इन्हें पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर में एक्सेप्ट भी किया जाएगा.

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भारत की राह पर चला EU, बना डाली डिजिलॉकर की कॉपी! जानें कैसे करेगा काम
Courtesy: Canva

EU Digital ID Wallet: यूरोपियन यूनियन अपना खुद का यनिवर्सल डिजिटल आइडेंटिटी सिस्टम पेश करने की तैयारी कर रहा है जिसके साथ यह डिजिटल आइडेंटिटी वॉलेट भी पेश करने जा रहा है जो EU सिटेजन, रेसिडेंट और बिजनेसेज के लिए होंगे और इन्हें 2026 तक पेश कर दिया जाएगा. भारत के पास एक ऐसा ही प्लेटफॉर्म है जिसका नाम DigiLocker है. इसका मतलब यह है कि EU अब जल्द ही डिजिलॉकर को कॉपी करने वाला है. 

सबसे पहले इसे 2021 में पेश किया गया था. हालांकि, उस समय यह पायलट-फेज में था और टेस्ट किया जा रहा था. पिछले कुछ वर्षों में इसे कई जगह पर टेस्ट किया गया. चलिए जानते हैं कि आखिर EU का डिजिटल आईडी वॉलेट किस तरह काम करेगा. 

EU का डिजिटल आईडी वॉलेट किस तरह करेगा काम? 

यूरोपियन यूनियन का डिजिटल आईडी वॉलेट्स ऐप के तौर पर उपलब्ध कराए गए हैं और इन्हें फ्री में डाउनलोड किया जा सकेगा. यह केवल यूरोपीय लोगों के लिए ही उपलब्ध है. इसका इस्तेमाल तब किया जा सकेगा जब पब्लिक या प्राइवेट सर्विसेज के लिए आईडेंटिटी या एज को वेरिफाई कराना होगा. 

यह वॉलेट एक डिजिटल रिपोजिटरी के तौर पर भी काम आ सकते हैं जिससे लोग इसमें अपने जरूरी डॉक्यूमेंट्स जैसे पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, एजुकेशनल सर्टिफिकेट, बैंक अकाउंट, मेडिकिल सर्टिफिकेट आदि स्टोर कर सकते हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि इनमें से किसी भी डॉक्यूमेंट पर ई-साइन किया जा सकेगा. 

यूरोपियन यूनियन का नया कानून मई 2024 से लागू कर दिया गया है जिसमें यूरोपियन यूनियन की पब्लिक अथॉरिटीज और प्राइवेट इंस्टीट्यूट इन वॉलेट को जारी कर सकते हैं. हालांकि, कहा जा रहा है कि आम जनता के लिए इन्हें डाउनलोड करना और साइन अप करना फिलहाल जरूरी नहीं है. किसी भी तरह की आइडेंटिटी और ऑथेंटिकेशन के लिए डिजिटल आईडी वॉलेट को एक्सेप्ट करना कानूनी तौर पर जरूरी होगा. 

डिजिटल आईडी वॉलेट किस तरह से सिक्योरिटी और प्राइवेसी रहेंगे? 

डिजिटल आईडी वॉलेट्स की सिक्योरिटी और प्राइवेसी सुनिश्चित रखने के लिए ट्रैकिंग और प्रोफाइलिंग सीमित रखी जाएगी. यूजर्स के पास एक ऑप्शन भी होगा कि वो थर्ड पार्टी को यह रिक्वेस्ट सेंड कर सकते हैं कि वो अपने पास से उनका डाटा डिलीट कर दें. इसके अलावा इन वॉलेट्स को तब सस्पेंड कर दिया जाएगा जब इन पर कोई भी सिक्योरिटी रिस्क नजर आएगा. 

EU का डिजिटल आईडी वॉलेट किस तरह से Digilocker की तरह है:

EU का डिजिटल आईडी वॉलेट काफी हद तक डिजिलॉकर की तरह ही काम करेगा. भारत के डिजिलॉकर में लोग अपने सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स को सेव रखते हैं और अगर कहीं इन्हें दिखाने की जरूरत पड़े तो दिखा सकते हैं. इन्हें पब्लिक और प्राइवेट दोनों सेक्टर में एक्सेप्ट किया जाता है. ठीक इसी तरह से EU का डिजिटल आईडी वॉलेट भी काम करेगा. इसमें भी यूरोपियन लोग अपने डॉक्यूमेट्स को सेव रख सकते हैं और इन्हें भी पब्लिक और प्राइवेट दोनों जगह एक्सेप्ट दिया जाएगा.