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India Daily

'बेंगलुरु को क्या मिला?', डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने आम बजट को बताया फेल; कहा- ये कर्नाटक के लिए बड़ा झटका

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने केंद्रीय बजट 2026 को राज्य के लिए अत्यंत निराशाजनक बताया है. उन्होंने मनरेगा में बदलाव, बेंगलुरु के विकास की अनदेखी और किसानों के एमएसपी जैसे गंभीर मुद्दों पर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की है.

Kanhaiya Kumar Jha
'बेंगलुरु को क्या मिला?', डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने आम बजट को बताया फेल; कहा- ये कर्नाटक के लिए बड़ा झटका
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट को जहां बीजेपी और एनडीए में शामिल पार्टियां 'रिफार्म एक्सप्रेस' करार दे रही है, वही विपक्षी पार्टियों द्वारा इसे निराशाजनक करार दिया जा रहा है. इसी कड़ी में कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बजट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बजट को विफल करार दिया है. उन्होंने आरोप लगाए कि इस बजट से कर्नाटक को निराशा हाथ लगी है.  उन्होंने कहा कि केंद्र ने राज्य की प्रमुख आर्थिक जरूरतों और विकास की वित्तीय अपेक्षाओं को इस बजट में पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है.

डीके शिवकुमार ने बजट की शुरुआती समीक्षा करते हुए पत्रकारों से कहा कि राज्य को केंद्रीय आवंटन से कोई भी ठोस लाभ मिलता नहीं दिख रहा है. उन्होंने चिंता जताई कि कर्नाटक जैसे बड़े राजस्व देने वाले राज्य को प्रमुख वित्तीय प्रावधानों में दरकिनार कर दिया गया है. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह अभी पूरे बजट का विस्तृत अध्ययन करेंगे, लेकिन उनके शुरुआती आकलन के अनुसार यह बजट राज्य की जनता की आकांक्षाओं के साथ एक बड़ा विश्वासघात है.

ग्रामीण रोजगार योजना पर प्रहार 

उपमुख्यमंत्री ने ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम में किए गए बदलावों की कड़े शब्दों में निंदा की. उन्होंने नई ग्रामीण रोजगार योजना और उसके नए फंड-शेयरिंग फार्मूले को पूरी तरह अव्यावहारिक बताया. शिवकुमार ने मांग की कि मनरेगा (MGNREGA) अधिनियम को उसके मूल और पुराने स्वरूप में ही बहाल किया जाना चाहिए. उनका तर्क है कि वर्तमान जटिल फार्मूले के कारण राज्य सरकारों के लिए इस योजना को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करना मुश्किल हो जाएगा.

बेंगलुरु के वैश्विक दर्जे पर सवाल 

बेंगलुरु शहर के विकास के प्रभारी मंत्री होने के नाते शिवकुमार ने शहर की अनदेखी पर तीखे सवाल पूछे. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने बयानों को याद दिलाया जहां उन्होंने बेंगलुरु को एक 'ग्लोबल सिटी' कहा था. शिवकुमार ने पूछा कि अगर यह वाकई एक वैश्विक शहर है, तो केंद्र सरकार ने बजट में इसके बुनियादी ढांचे के लिए क्या विशेष प्रावधान किए हैं? राजधानी की बढ़ती आबादी और शहरी समस्याओं के समाधान के लिए कोई बड़ी वित्तीय घोषणा न होना दुखद है.

चीनी मिलों और एमएसपी का संकट 

कृषि और सहकारी क्षेत्रों की चर्चा करते हुए शिवकुमार ने कर्नाटक की चीनी मिलों की समस्याओं पर ध्यान आकर्षित किया. उन्होंने कहा कि सहकारी क्षेत्र के तहत चलने वाली मिलें केंद्र के उदासीन रवैये के कारण भारी संकट का सामना कर रही हैं. इसके अलावा, उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के मुद्दे पर केंद्र की जिम्मेदारी तय करने की बात कही. शिवकुमार के अनुसार, केंद्र के पास एमएसपी तय करने का अधिकार है, इसलिए उसे किसानों के हित में तुरंत प्रभावी कदम उठाने चाहिए.