चित्रकूट: चित्रकूट के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने एक सराहनीय कदम उठाते हुए अपनी तीन साल की बेटी सिया का दाखिला सरकारी आंगनवाड़ी केंद्र में कराया है. यह फैसला न सिर्फ व्यक्तिगत है, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर गहरा भरोसा जताने वाला भी है. आज के समय में जब ज्यादातर माता-पिता महंगे प्राइवेट स्कूलों की ओर भागते हैं, वहीं एक आईएएस अधिकारी ने अपनी बेटी को सरकारी आंगनवाड़ी में भेजकर एक मजबूत संदेश दिया है.
पुलकित गर्ग उत्तर प्रदेश कैडर के 2016 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में चित्रकूट जिले के डीएम हैं. उन्होंने अपनी बेटी सिया का एडमिशन करवी के नया बाजार इलाके में स्थित एक सरकारी कंपोजिट स्कूल से जुड़े आंगनवाड़ी केंद्र के प्ले ग्रुप में कराया. उन्होंने खुद केंद्र का दौरा किया और चार दिन पहले दाखिला प्रक्रिया पूरी की. सोशल मीडिया पर सिया के आंगनवाड़ी में खेलते हुए वीडियो भी खूब वायरल हो रहे हैं.
IAS Pulkit Garg currently serves as the District Magistrate (DM) of Chitrakoot, a region known for its cultural significance and scenic beauty. He has taken a proactive step by enrolling his daughter, Siya, in a local government Anganwadi centre. This initiative not only ensures… pic.twitter.com/4GRl6P88Rh
— Bureaucrats Media (@MBureaucrats) February 1, 2026
आंगनवाड़ी केंद्र भारत सरकार की इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट सर्विसेज (आईसीडीएस) योजना के तहत चलते हैं. ये केंद्र बच्चों को पौष्टिक भोजन, प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य जांच और सामाजिक विकास की सुविधा देते हैं. छोटे बच्चों के लिए ये पहला कदम होता है जहां वे खेल-खेल में सीखते हैं और साथियों के साथ समय बिताते हैं. पुलकित गर्ग का यह निर्णय दिखाता है कि सरकारी संस्थानों में सुधार हो रहा है और इनकी गुणवत्ता बेहतर हो रही है. संसाधनों की कोई कमी नहीं है और ये केंद्र बच्चों के समग्र विकास के लिए बेहतरीन हैं.
डीएम पुलकित गर्ग का कहना है कि अगर एक आईएएस अधिकारी अपनी बेटी को सरकारी संस्थान में पढ़ा सकता है, तो आम अभिभावकों को भी हिचकिचाने की जरूरत नहीं. उनका यह कदम सरकारी शिक्षा प्रणाली में विश्वास बढ़ाने और नामांकन को प्रोत्साहित करने का प्रयास है. इससे जिले में अन्य माता-पिता भी प्रेरित हो सकते हैं और अपने बच्चों को आंगनवाड़ी या सरकारी स्कूलों में भेजने के लिए आगे आएंगे. यह घटना सामाजिक समानता का भी प्रतीक है. जहां अमीर-गरीब का फर्क शिक्षा में दिखता है, वहां एक उच्च अधिकारी का ऐसा फैसला सबको बराबरी का संदेश देता है.
पुलकित गर्ग की पत्नी भी भारतीय स्टेट बैंक में अधिकारी हैं, लेकिन उन्होंने दिखावे से दूर रहकर सरकारी व्यवस्था को चुना. सोशल मीडिया पर लोग इस कदम की तारीफ कर रहे हैं. कई यूजर्स लिख रहे हैं कि ऐसे अधिकारी होने चाहिए जो बातों से नहीं, काम से मिसाल पेश करें.