नई दिल्ली: आजकल घर में स्मार्ट टीवी, स्मार्ट वॉशिंग मशीन, स्मार्ट फ्रिज, स्मार्ट लाइट और स्मार्ट स्पीकर जैसी चीजें आम हो गई हैं. ये डिवाइसेज हमारे काम को आसान बनाती हैं, लेकिन इनकी एक बड़ी समस्या यह है कि ये चुपके-चुपके हमारी निजी जानकारी इकट्ठा करती रहती हैं. ये सिर्फ यह नहीं देखते कि आपने मशीन कब ऑन की, बल्कि ये आपकी पूरी आदत ट्रैक करते हैं.
उदाहरण के लिए, स्मार्ट वॉशिंग मशीन जानती है कि आप हफ्ते में कितनी बार कपड़े धोते हैं, कौन-सा वॉश मोड सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं और कितनी बिजली खर्च होती है. वहीं, स्मार्ट फ्रिज बताता है कि आप कौन-कौन सी चीजें ज्यादा खरीदते हैं. स्मार्ट टीवी देखता है कि आप कौन से शो या फिल्में देखते हैं.
कई कंपनियां आपका ZIP कोड, फोन नंबर, घर का पता और लोकेशन जैसी निजी जानकारी भी इकट्ठा करती हैं. ये डाटा उनके सर्वर पर सेव होता है. किसी भी प्रोडक्ट को खरीदने से पहले आपको उस डिवाइस की Privacy Policy पढ़नी चाहिएय़
यह जानकारी कंपनी की वेबसाइट, ऐप या प्रोडक्ट मैनुअल में मिल जाती है. कंपनियां कहती हैं कि यह डेटा प्रोडक्ट को बेहतर बनाने, नई सुविधाएं जोड़ने और खराबी ठीक करने के लिए इस्तेमाल होता है. लेकिन कई बार यह डेटा पर्सनलाइज्ड विज्ञापन दिखाने, मार्केटिंग और बिजनेस एनालिसिस के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है.
जब AI और कई स्मार्ट डिवाइस एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं तो वे आपकी पूरी दिनचर्या, बिजली खपत और आदतों की पूरी तस्वीर बना लेते हैं. इससे आपकी निजी जिंदगी पर नजर रखना आसान हो जाता है.
सबसे पहले तो आपको किसी भी अप्लायंस की प्राइवेसी पॉलिसी को ध्यान से पढ़ना चाहिए.
जरूरी न हो तो डिवाइस को इंटरनेट से डिस्कनेक्ट रखें.
डिवाइस के साथ केवल जरूरी डाटा ही शेयर करें.
वही डिवाइस लें, जिसकी प्राइवेसी सेटिंग्स अच्छी हो.