नई दिल्ली: कृत्रिम बुद्धिमत्ता की तेजी से बढ़ती क्षमता के बीच Anthropic के CEO डारियो अमोदेई ने सावधानी बरतने की अपील की है. उन्होंने AI मॉडल की क्षमताएं बढ़ाने की रफ्तार को धीमा करने की जरूरत बताई है. अमोदेई का मानना है कि AI से मानवता को बड़े फायदे मिल सकते हैं, लेकिन इसके साथ जुड़े खतरे भी गंभीर हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन नहीं बनाया गया तो आने वाले समय में स्वायत्त AI एजेंटों की ताकत बेहद तेजी से बढ़ सकती है.
अमोदेई ने कहा कि AI क्षेत्र में प्रगति रोकने की नहीं, बल्कि उसकी गति को समझदारी से नियंत्रित करने की जरूरत है. उनका तर्क है कि सुरक्षा व्यवस्था को नई क्षमताओं के साथ कदम मिलाने का समय मिलना चाहिए. उनके मुताबिक केवल जोखिम कम करने पर निवेश करना पर्याप्त नहीं होगा. AI मॉडल जिस तेजी से अधिक सक्षम हो रहे हैं, उसी अनुपात में सुरक्षा उपायों को भी मजबूत करना जरूरी है.
अमोदेई ने AI एजेंटों की बढ़ती स्वायत्तता को लेकर गंभीर चिंता जताई है. उनका आकलन है कि अगर विकास इसी गति से चलता रहा तो आने वाले करीब छह महीनों में AI एजेंटों के बड़े समूह इंटरनेट पर बहुत व्यापक प्रभाव डालने की स्थिति में पहुंच सकते हैं. यह उनका जोखिम आकलन है, कोई निश्चित समयसीमा या तय परिणाम नहीं. हाल की घटनाओं में AI एजेंटों द्वारा बाहरी डिजिटल प्रणालियों तक अनधिकृत पहुंच की घटनाओं ने भी ऐसी चिंताओं को बढ़ाया है.
अमोदेई AI के संभावित फायदे को भी रेखांकित करते रहे हैं. उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से इस तकनीक पर इसलिए काम कर रहे हैं क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि AI इंसानी जीवन की गुणवत्ता में बड़ा सुधार ला सकती है. उनका अनुमान है कि अगले 5 से 10 वर्षों में AI कई गंभीर बीमारियों के इलाज में अहम भूमिका निभा सकती है. यानी उनकी चिंता AI के खिलाफ नहीं, बल्कि इसके विकास को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाने को लेकर है.
AI अब केवल सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं है. Anthropic की अपनी हालिया रिपोर्ट के मुताबिक AI का इस्तेमाल कई साइबर अभियानों में सीधे काम कराने और अलग-अलग एजेंटों के जरिए जटिल गतिविधियां संचालित करने में किया जा रहा है. कुछ मामलों में कई एजेंटों ने एक साथ काम करते हुए जानकारी जुटाने, सिस्टम में घुसने और डेटा निकालने जैसे काम किए. इससे AI के दुरुपयोग की क्षमता और पैमाना दोनों बढ़ने की चिंता सामने आई है.
अमोदेई का संदेश यह है कि AI की प्रगति पूरी तरह रोकने के बजाय उसे नियंत्रित गति से आगे बढ़ाया जाए. उनका कहना है कि धीमी रफ्तार का मतलब यह नहीं होगा कि तकनीकी विकास रुक जाएगा. प्रगति तब भी तेज रहेगी, लेकिन शोधकर्ताओं और कंपनियों को सुरक्षा उपाय मजबूत करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा. Anthropic भी हाल के महीनों में AI के दुरुपयोग और स्वायत्त प्रणालियों से जुड़े जोखिमों पर लगातार रिपोर्ट और सुरक्षा उपाय जारी कर रहा है.