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स्मार्टफोन का नशा ही ऐसा है, बच्चें भी नहीं रहते याद! सामने आई चौंकाने वाली स्टडी

अगर आप अपने बच्चे पर ध्यान न देकर स्मार्टफोन ध्यान देते हैं तो आपको सावधान रहने की जरूरत है. चलिए जानते हैं क्यों

Shilpa Srivastava
स्मार्टफोन का नशा ही ऐसा है, बच्चें भी नहीं रहते याद! सामने आई चौंकाने वाली स्टडी

हाइलाइट्स

  • Vivo-CMR ने की माता-पिता पर रिसर्च
  • स्मार्टफोन यूसेज के चलते मानते हैं खुद को दोषी

आज के डिजिटल युग में स्मार्टफोन हमारी रोजमर्रा की जिंजगी का एक जरूरी हिस्सा बन गया है. हालांकि, इन डिजिचल डिवाइसेज का इस्तेमाल इतना ज्यादा होने लगा है कि हम अपने घरवालों या अपने बच्चों पर ही ध्यान नहीं दे पाते हैं. स्मार्टफोन के ज्यादा इस्तेमाल के चलते लोगों को जागरूक करने और स्मार्टफोन के साथ लोगों के संबंधों को बेहतर बनाने के लिए स्मार्टफोन निर्माता Vivo ने साइबरमीडिया रिसर्च (CMR) के साथ मिलकर Vivo Switch Off स्टडी की है. 

इस स्टडी में बताया गया है कि माता-पिता-बच्चे के रिश्ते पर स्मार्टफोन का इफेक्ट कैसा है. Vivo ने लोगों को इस मुद्दे को बेहतर तरह से समझाने के लिए हेल्थ और साइंस राइटर कैथरीन प्राइस को अपने साथ जोड़ा है. इन्होंने How to Break Up with your Phone – The 30 Day Plan to Take Back Your Life बुक लिखी है और यह Screen/life Balance की फाउंडर भी हैं जो एक रिसोर्स हब है जो लोगों को उनके स्मार्टफोन के साथ अपने भी परिवार से रिश्ते बेहतर करने में मदद करता है. 

कैथरीन ने Vivo को कहा है कि लोगों को स्मार्टफोन के सही इस्तेमाल को सुनिश्चित करना होगा. साथ ही उन्हें अपनी प्रोडक्टिव हैबिट को आदत में लाना होगा. 

स्टडी के कुछ जरूरी प्वाइंट्स: 

  • दिलचस्प बात यह है कि माता-पिता हर दिन अपने स्मार्टफोन पर 7.7 घंटे बिताते हैं, जो बच्चों की तुलना में 1.2 घंटे ज्यादा है. 

  • 87% और 73% माता-पिता इस बात से सहमत हैं कि सुबह उठने के बाद और बिस्तर पर जाने से पहले वो फोन पहली और आखिरी चीज देखते हैं. बच्चों में, ये आंकड़े थोड़ा कम होकर क्रमशः 83% और 69% हो जाता है. 

  • औसतन, बच्चे और माता-पिता लगभग दो घंटे एक साथ बिताते हैं, लेकिन उनमें से लगभग 75% ने स्वीकार किया है कि इस समय के दौरान वो अपने फोन का इस्तेमाल करते हैं. 

  • 93% माता-पिता और बच्चे एक-दूसरे के साथ क्वालिटी टाइम न बिताने के बारे में खुद को दोषी महसूस करते हैं. 

  • 91% बच्चे अपने माता-पिता के स्मार्टफोन के इस्तेमाल करने के चलते कहीं ज्यादा अकेलापन महसूस करते हैं. सोशल मीडिया पर बहुत सारे दोस्त होने के बावजूद 90% बच्चे अकेलापन महसूस करते हैं.