उत्तराखंड में शुक्रवार रात से शुरू हुई बारिश शनिवार को भी जारी रही. देहरादून, टिहरी और पौड़ी में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश और कहीं-कहीं अत्यंत भारी वर्षा होने की संभावना जताई गई है.
बारिश के कारण देहरादून में अधिकतम तापमान सामान्य से करीब छह डिग्री नीचे रहा, जबकि पंतनगर में तापमान सामान्य से 11 डिग्री कम दर्ज किया गया.
कुमाऊं क्षेत्र में बारिश का असर सबसे ज्यादा देखने को मिला है. पिछले 24 घंटे में चंपावत के बनबसा में 130 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई, जबकि टनकपुर में 113 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई. रुद्रप्रयाग, चमोली, देहरादून, टिहरी, नैनीताल, बागेश्वर और पिथौरागढ़ समेत कई क्षेत्रों में भी 50 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश हुई. बागेश्वर में कांडा-खाईखाल के पास पहाड़ी से मलबा और पत्थर सड़क पर आ जाने के कारण गरुड़-बागेश्वर राष्ट्रीय मार्ग बाधित हो गया.
नैनीताल में लगातार बारिश के कारण हल्द्वानी-नैनीताल मार्ग डोलमार और ज्योलीकोट के पास बंद हो गया. पिथौरागढ़ में घाट क्षेत्र में पत्थर गिरने से रास्ता बाधित है. जिले की 13 सड़कें बंद होने की जानकारी है. चंपावत में भी तीन ग्रामीण सड़कों पर यातायात प्रभावित हुआ है. उत्तरकाशी में बारिश के साथ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी ने ठंड बढ़ा दी है. गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के आसपास की चोटियों पर बर्फ गिरने के साथ यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग दुर्बिल के पास पत्थर आने से बंद हो गया.
मौसम की गंभीर स्थिति को देखते हुए रविवार को चारधाम यात्रा स्थगित कर दी गई है. बदरीनाथ धाम समेत ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हिमपात जारी है. धारचूला और मुनस्यारी के ऊंचाई वाले गांवों में भी बर्फबारी हुई है. भूस्खलन की आशंका को देखते हुए मां पूर्णागिरि धाम के कपाट भी अगले आदेश तक बंद कर दिए गए हैं.
इसके अलावा आदि कैलास और ओम पर्वत दर्शन के लिए इनर लाइन परमिट 26 अक्टूबर तक बंद रखने की जानकारी दी गई है. जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर शनिवार को कई उड़ानों के संचालन में बदलाव हुआ. मौसम की स्थिति को देखते हुए पहाड़ी क्षेत्रों में सफर करने वाले लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है. लगातार बारिश के दौरान भूस्खलन और अचानक सड़क बंद होने का खतरा बना हुआ है.