देहरादून: उत्तराखंड में सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की दिशा में सोमवार को प्रशासन ने एक और बड़ा कदम उठाया. ऊधम सिंह नगर जिले में 'लैंड जिहाद' और आरक्षित वन क्षेत्रों में बढ़ते अवैध कब्जों के खिलाफ मुस्तैदी दिखाते हुए वन विभाग ने दो अवैध मजारों को मलबे में तब्दील कर दिया. यह कार्रवाई तराई पूर्व वन प्रभाग के बराकोली रेंज में की गई, जहां काफी समय से वन भूमि पर अवैध धार्मिक ढांचे खड़े करने की शिकायतें मिल रही थीं. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कड़े रुख के बाद प्रशासन अब जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहा है.
तराई वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) हिमांशु बागड़ी ने इस सैन्य अभियान जैसी सटीकता से की गई कार्रवाई की पुष्टि की. उन्होंने बताया कि बराकोली रेंज के धराड़म क्षेत्र में स्थित इन ढांचों के लिए नवी अहमद और सरवर को पहले ही नोटिस जारी किए गए थे. विभाग ने उन्हें भूमि के स्वामित्व से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने का पर्याप्त समय दिया था. जब कब्जाधारी कोई भी कानूनी साक्ष्य पेश करने में विफल रहे और स्वयं निर्माण हटाने के आदेश की अनदेखी की, तो विभाग ने बलपूर्वक ध्वस्तीकरण का मार्ग अपनाया.
ध्वस्तीकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए सोमवार सुबह करीब पांच बजे प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम जेसीबी मशीनों के साथ मौके पर पहुंची. किसी भी संभावित विरोध से निपटने के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी. धराड़म क्षेत्र में आरक्षित वन भूमि पर खड़ी इन दोनों अवैध संरचनाओं को चंद घंटों में जमींदोज कर दिया गया. वन विभाग ने न केवल ढांचों को गिराया, बल्कि मौके से मलबा भी पूरी तरह साफ करवा दिया है ताकि भविष्य में उस स्थान पर दोबारा किसी भी प्रकार का निर्माण न किया जा सके.
यह कार्रवाई मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उस हालिया बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण को राज्य की सुरक्षा और जनसांख्यिकी संतुलन के लिए खतरा बताया था. सीएम धामी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अवैध कब्जे विकास में बाधा तो हैं ही, साथ ही ये जनसांख्यिकी को भी प्रभावित करते हैं. उन्होंने अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए नियमित निगरानी के निर्देश दिए हैं. प्रशासन का यह 'बुलडोजर एक्शन' उन लोगों के लिए सख्त चेतावनी है जिन्होंने आरक्षित वन क्षेत्रों को अपना ठिकाना बना लिया है.