उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को अपने गृह क्षेत्र खटीमा के नगला तराई स्थित खेत में पहुंचकर कृषि कार्यों में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने अपनी माता जी के साथ खेत की जुताई और खाद डालने का कार्य किया. मुख्यमंत्री ने इस अनुभव को अपने जीवन के भावनात्मक और प्रेरणादायक क्षणों से जोड़ते हुए सोशल मीडिया पर एक विशेष संदेश भी साझा किया.
मुख्यमंत्री की यह तस्वीर और संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गए हैं. खेत में पारंपरिक कृषि कार्य करते हुए मुख्यमंत्री का यह अंदाज लोगों को उनकी सादगी और अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश देता नजर आया.
मुख्यमंत्री धामी ने अपने संदेश में कहा कि खेत में काम करते हुए उन्हें अपने जीवन के वे दिन याद आ गए, जब ग्रामीण परिवेश में संघर्ष और मेहनत के बीच जीवन आगे बढ़ता था. उन्होंने लिखा कि कृषि कार्यों में सहभागिता के दौरान किसानों के अथक परिश्रम, समर्पण और त्याग को उन्होंने करीब से महसूस किया.
उन्होंने कहा कि खेत में बिताया गया समय केवल कृषि गतिविधियों तक सीमित नहीं था, बल्कि यह उनके लिए उन स्मृतियों को दोबारा जीने का अवसर भी था, जिन्होंने उनके व्यक्तित्व और जीवन मूल्यों को आकार दिया. मुख्यमंत्री ने इस अनुभव को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि किसानों की मेहनत को समझने और महसूस करने का यह एक महत्वपूर्ण अवसर था.
खटीमा के नगला तराई में आज माता जी के साथ अपने खेत में कृषि कार्यों में सहभागिता की। खेत की जुताई एवं खाद डालते हुए किसानों के अथक परिश्रम, समर्पण और त्याग को निकटता से अनुभव किया। इस दौरान जीवन के वे सरल, संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायी दिन भी स्मृतियों में पुनः जीवंत हो उठे।
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) June 15, 2026
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अपने संदेश में मुख्यमंत्री धामी ने किसानों को देश की खाद्य सुरक्षा का सबसे मजबूत स्तंभ बताया. उन्होंने कहा कि किसान केवल अनाज उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे देश की सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और ग्रामीण जीवन मूल्यों के वास्तविक संरक्षक भी हैं.
उन्होंने कहा कि खेतों में दिन-रात मेहनत करने वाले किसान देश की अर्थव्यवस्था और समाज दोनों को मजबूती प्रदान करते हैं. उनके अथक श्रम के कारण ही करोड़ों लोगों तक भोजन पहुंचता है और देश की खाद्य व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित होती है. मुख्यमंत्री ने किसानों की तपस्या, त्याग और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि देश के विकास और आत्मनिर्भरता की यात्रा में किसानों का योगदान अमूल्य है. खेतों में कठिन परिस्थितियों के बीच काम करने वाले अन्नदाता राष्ट्र की प्रगति के वास्तविक नायक हैं.