दिल्ली-एनसीआर से सटे उत्तर प्रदेश के जेवर में निर्मित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट सोमवार से परिचालन की शुरुआत कर रहा है. यह परियोजना न केवल प्रदेश बल्कि पूरे उत्तर भारत की हवाई कनेक्टिविटी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है. एयरपोर्ट की पहली उड़ान को भी खास बनाया गया है. इस ऐतिहासिक मौके पर उन किसानों को पहली यात्रा का अवसर दिया गया है, जिन्होंने एयरपोर्ट निर्माण के लिए अपनी जमीन उपलब्ध कराई थी.
जेवर एयरपोर्ट से पहली विशेष उड़ान जेवर से लखनऊ के लिए रवाना होगी. लखनऊ पहुंचने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन किसानों से मुलाकात कर उनका सम्मान करेंगे. इसे प्रदेश सरकार की ओर से किसानों के योगदान को सम्मान देने की पहल के रूप में देखा जा रहा है.
यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी के तहत विकसित यह एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार की सबसे बड़ी आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल है. इसके निर्माण के लिए करीब 1,334 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी वर्ष मार्च में इस एयरपोर्ट का उद्घाटन करते हुए इसे क्षेत्रीय विकास, निवेश, व्यापार और रोजगार के नए केंद्र के रूप में वर्णित किया था. माना जा रहा है कि एयरपोर्ट के संचालन से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर के विकास को नई गति मिलेगी.
एयरपोर्ट के शुरू होते ही विभिन्न शहरों के लिए हवाई सेवाएं उपलब्ध हो जाएंगी. इंडिगो एयरलाइंस ने 16 जून से बेंगलुरु और जम्मू के लिए उड़ानों की शुरुआत की है. इसके अलावा आने वाले दिनों में जयपुर, श्रीनगर, चंडीगढ़, देहरादून, धर्मशाला, भोपाल, जोधपुर, पंतनगर, लखनऊ और नवी मुंबई सहित कई अन्य शहरों को भी जोड़ा जाएगा. एयरलाइन का दावा है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को जल्द ही देश के 16 से अधिक शहरों से जोड़ा जाएगा. इससे यात्रियों को दिल्ली एयरपोर्ट पर निर्भरता कम करने का विकल्प मिलेगा और क्षेत्रीय हवाई यात्रा को बढ़ावा मिलेगा.
यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नोएडा और ग्रेटर नोएडा से एयरपोर्ट तक इलेक्ट्रिक बस सेवा भी शुरू की गई है. कुल 100 ई-बसें इस रूट पर संचालित होंगी, जिनमें 10 डबल डेकर बसें शामिल हैं. फिलहाल एयरपोर्ट का पहला चरण तैयार हुआ है. वर्तमान में यहां एक रनवे, एक एकीकृत टर्मिनल भवन और एयर ट्रैफिक कंट्रोल टॉवर का निर्माण पूरा हो चुका है. इस चरण में सालाना लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों की आवाजाही की क्षमता विकसित की गई है. परियोजना को कुल चार चरणों में पूरा किया जाएगा.