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India Daily

BRICS मंच पर उत्तराखंड का जलवा, सिलक्यारा रेस्क्यू बना आपदा प्रबंधन का 'बेस्ट प्रैक्टिस' मॉडल

प्रस्तुति में अधिकारियों ने उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति को लेकर आने वाली चुनौतियों का जिक्र किया. राज्य में भूस्खलन, बादल फटना, अत्यधिक वर्षा, ग्लेशियर झीलों का खतरा, सड़कें बंद होना और चारधाम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों की आवाजाही जैसी समस्याएं आम हैं.

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Edited By: Antima Pal
BRICS मंच पर उत्तराखंड का जलवा, सिलक्यारा रेस्क्यू बना आपदा प्रबंधन का 'बेस्ट प्रैक्टिस' मॉडल
Courtesy: Pinterest

उत्तराखंड: उत्तराखंड ने BRICS Disaster Risk Reduction (DRR) वर्किंग ग्रुप की बैठक में अपने आपदा प्रबंधन मॉडल को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलतापूर्वक पेश किया. राज्य ने सिलक्यारा टनल रेस्क्यू ऑपरेशन को अपनी सर्वश्रेष्ठ प्रैक्टिस के रूप में हाइलाइट किया. 

BRICS मंच पर उत्तराखंड का जलवा

3 से 5 जून तक ओडिशा के पुरी में आयोजित इस दूसरी तकनीकी बैठक की मेजबानी भारत कर रहा था. BRICS देशों के अलावा मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, UAE और इंडोनेशिया के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल हुए. 

बैठक में नीति निर्माताओं, विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों ने आपदा जोखिम कम करने, सामुदायिक लचीलापन बढ़ाने और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था को मजबूत करने पर चर्चा की. उत्तराखंड प्रतिनिधिमंडल ने SDRF कमांडेंट अर्पण यादुवंशी और ULMMC डायरेक्टर शांतनु सरकार के नेतृत्व में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तहत विकसित आपदा जोखिम न्यूनीकरण ढांचे को प्रस्तुत किया. 

उत्तराखंड के चुनौतीपूर्ण भूगोल पर फोकस

प्रस्तुति में अधिकारियों ने उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति को लेकर आने वाली चुनौतियों का जिक्र किया. राज्य में भूस्खलन, बादल फटना, अत्यधिक वर्षा, ग्लेशियर झीलों का खतरा, सड़कें बंद होना और चारधाम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों की आवाजाही जैसी समस्याएं आम हैं. प्रतिनिधिमंडल ने राज्य में अपनाई गई तैयारियों, क्षमता निर्माण कार्यक्रमों, आधुनिक तकनीकी हस्तक्षेपों और प्रभावी ऑपरेशनल रिस्पॉन्स सिस्टम के बारे में विस्तार से बताया.

मल्टी-एजेंसी समन्वय पर जोर

बैठक में उत्तराखंड ने विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय को अपनी सफलता का मुख्य आधार बताया. सिलक्यारा टनल बचाव अभियान को उदाहरण के रूप में पेश किया गया, जिसमें राष्ट्रीय और राज्य स्तर की एजेंसियों, सेना, NDRF, SDRF और स्थानीय प्रशासन ने मिलकर काम किया था. इस रेस्क्यू को दुनिया भर में सराहा गया था.

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में चल रही पहलें

प्रतिनिधिमंडल ने आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के मार्गदर्शन में चल रही विभिन्न पहलों की जानकारी भी साझा की. इनमें सामुदायिक आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, पूर्वानुमान आधारित प्रतिक्रिया तंत्र, लचीली बुनियादी ढांचा विकास और वित्तीय मॉडल शामिल हैं.

बैठक में resilient infrastructure, community-based early warning systems और financing models जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई. उत्तराखंड के मॉडल को अन्य देशों के प्रतिनिधियों ने काफी सराहा. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार आपदा प्रबंधन को लेकर लगातार नई रणनीतियां बना रही है. राज्य का लक्ष्य है कि भविष्य में आने वाली आपदाओं से कम से कम नुकसान हो और लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.