उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. लिपुलेख दर्रे के माध्यम से भारत-चीन सीमा व्यापार एक बार फिर शुरू होने जा रहा है. 1 अगस्त 2026 से पहले चरण में 20 व्यापारी और उनके सहायकों को चीन के तकलाकोट जाने की अनुमति दी गई है. चीन सरकार की ओर से इसकी आधिकारिक स्वीकृति धारचूला प्रशासन को ई-मेल के माध्यम से भेज दी गई है. करीब छह वर्षों बाद व्यापार शुरू होने से सीमांत व्यापारियों में खुशी का माहौल है.
धारचूला के उपजिलाधिकारी एवं अंतरराष्ट्रीय व्यापार अधिकारी आशीष जोशी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, पहले चरण में केवल उन्हीं व्यापारियों को सीमा पार जाने की अनुमति मिलेगी, जिनकी दुकानें या व्यापारिक प्रतिष्ठान वर्ष 2019 से तकलाकोट मंडी में स्थापित हैं. पहला दल बिना नए सामान के चीन सीमा में प्रवेश करेगा. चीनी प्रशासन ने व्यापारियों की पहचान संबंधी सूची दोबारा उपलब्ध कराने को भी कहा है.
प्रशासन ने भारत-चीन सीमा व्यापार समिति के पदाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि निर्धारित मानकों के अनुसार 20 व्यापारियों और सहायकों की प्रमाणित सूची 27 जुलाई की सुबह 11 बजे तक कार्यालय में उपलब्ध कराई जाए, ताकि अंतिम सूची चीनी प्रशासन को भेजी जा सके. इसके बाद व्यापारियों के चीन रवाना होने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.
कोरोना महामारी के कारण वर्ष 2020 से भारत-चीन सीमा व्यापार पूरी तरह बंद था. इस वर्ष दोनों देशों की सहमति के बाद इसे दोबारा शुरू करने का फैसला लिया गया है. हालांकि, व्यापार 1 जून से शुरू होना था, लेकिन विभिन्न प्रशासनिक कारणों से इसमें देरी हुई. अब चीन की ओर से मंजूरी मिलने के बाद व्यापार फिर से पटरी पर लौटता दिखाई दे रहा है.
गत 8 जून को व्यापारियों का पहला दल तिब्बत जाने वाला था, लेकिन रवाना होने से ठीक पहले चीनी पक्ष ने संदेश भेजकर कहा था कि तकलाकोट मंडी में भारतीय व्यापारियों के लिए पर्याप्त दुकानें और गोदाम उपलब्ध नहीं हैं. इसके चलते अगली सूचना तक व्यापारियों की यात्रा रोक दी गई थी. अब आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद व्यापार शुरू करने की मंजूरी मिल गई है.