उत्तराखंड के चमोली जिले में एक अनोखे जीव की मौजूदगी ने ग्रामीणों के साथ-साथ प्रकृति प्रेमियों का भी ध्यान खींच लिया. पहली नजर में यह किसी विशाल तितली जैसा दिखाई दिया, लेकिन विशेषज्ञों ने इसकी पहचान दुनिया के सबसे बड़े पतंगों में गिने जाने वाले एटलस मॉथ के रूप में की. इस दुर्लभ जीव का दिखना क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और बेहतर वन पारिस्थितिकी का संकेत माना जा रहा है. इसकी बनावट और जीवन चक्र दोनों ही बेहद खास माने जाते हैं.
चमोली जिले के नवाना गांव की 78 वर्षीय उमा देवी ने सुबह घर के पास एक पेड़ की पत्तियों पर बड़े आकार का पंखों वाला जीव देखा. उसका आकार सामान्य तितलियों से कई गुना बड़ा था, जिससे वह चौंक गईं. उन्होंने उसकी तस्वीर लेकर परिवार को दिखाई. देखते ही देखते गांव में इस अनोखे जीव को लेकर चर्चा शुरू हो गई.
बाद में तितली विशेषज्ञ संजय सोंधी ने स्पष्ट किया कि यह तितली नहीं बल्कि एटलस मॉथ है. उन्होंने बताया कि चमोली, उत्तरकाशी, टिहरी और देहरादून के जंगलों में इसकी मौजूदगी मिलती है. किसी क्षेत्र में इसका दिखाई देना वहां की स्वस्थ वन व्यवस्था और समृद्ध जैव विविधता का सकारात्मक संकेत माना जाता है.
एटलस मॉथ के पंख लगभग 10 से 12 इंच तक फैल सकते हैं. इसके भूरे रंग और पंखों पर बने विशेष पैटर्न इसे अलग पहचान देते हैं. यही कारण है कि इसे एटलस नाम मिला. इसके पंखों की बनावट ऐसी होती है कि कई शिकारी जीव भ्रमित हो जाते हैं और इसके शरीर की सही दिशा पहचान नहीं पाते.
विशेषज्ञों के अनुसार वयस्क एटलस मॉथ केवल कुछ सप्ताह तक ही जीवित रहता है. इस दौरान वह भोजन नहीं करता क्योंकि उसके मुखांग पूरी तरह विकसित नहीं होते. वह इल्ली अवस्था में जमा ऊर्जा के सहारे अपना जीवन पूरा करता है. उसके जीवन का मुख्य उद्देश्य केवल प्रजनन करना होता है.
इस विशाल पतंगे के पंखदार स्पर्शक बेहद संवेदनशील होते हैं. यह मादा द्वारा छोड़ी गई फेरोमोन की हल्की गंध को कई किलोमीटर दूर से पहचान सकता है. इसके बाद मादा पेड़ों की पत्तियों पर अंडे देती है. कुछ समय बाद उनसे इल्लियां निकलती हैं, जो तेजी से बढ़कर कोकून बनाती हैं. तीन से चार सप्ताह बाद उसी कोकून से नया एटलस मॉथ बाहर निकलता है.