Uttarakhand SIR: अगर आप सोच रहे हैं कि वोटर लिस्ट में नाम है तो सब ठीक है-तो जरा रुकिए. उत्तराखंड में चल रहे एसआईआर अभियान में एक छोटी सी चूक भी आपको मतदाता सूची से बाहर कर सकती है. नाम की स्पेलिंग में फर्क हो, उम्र का हिसाब न मिले या दस्तावेज अधूरे हों-निर्वाचन आयोग इन सभी पर पैनी नजर रख रहा है और नोटिस भेजने में देर नहीं लगेगी.
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि 2003 की मूल सूची और मौजूदा डेटाबेस में नाम की स्पेलिंग में अंतर होने पर नोटिस जारी होगा. पुराने नाम में नया शब्द जुड़ा होने पर भी सफाई देनी होगी, जैसे पहले 'शिव रौतेला' और अब 'शिव शंकर रौतेला'. इसके अलावा छह मतदाताओं का नाम एक ही व्यक्ति से जुड़ा होना, पिता-पुत्र की उम्र में 15 साल से कम या 50 साल से अधिक का अंतर, दादा-पोते में 40 साल से कम का फर्क और दो भाई-बहनों में नौ महीने से कम का अंतर-ये सभी संदेह के दायरे में आएंगे.
सबसे जरूरी बात यह है कि बूथ लेवल ऑफिसर को नाम की गलती सुधारने का अधिकार नहीं दिया गया है. नोटिस मिलने पर मतदाता को खुद सही दस्तावेज जुटाने होंगे और एसडीएम कार्यालय जाकर अपनी पहचान साबित करनी होगी. यदि नोटिस की अनदेखी की गई और कोई जवाब नहीं दिया, तो संबंधित व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से काट दिया जाएगा.
देहरादून में करीब 1400 आशा कार्यकर्ताओं ने एसआईआर और राशन कार्ड सत्यापन का काम करने से साफ मना कर दिया है. डेंगू सर्वे, 28 जून से शुरू होने वाला पोलियो अभियान और स्वास्थ्य विभाग की अन्य जिम्मेदारियां पहले से ही कंधों पर हैं. साथ ही पिछले डेंगू सर्वे के तीन हजार रुपये अभी भी बकाया हैं.
अभियान के पहले दिन शाम चार बजे तक दो लाख 55 हजार 269 गणना फार्म वितरित किए गए. मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने मतदाताओं से बीएलओ को सहयोग करने और नया पासपोर्ट साइज फोटो देने की अपील की. हालांकि हरिद्वार में विसंगतियों का प्रतिशत अधिक होने और पौड़ी जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में नेटवर्क समस्या से बीएलओ को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है.