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सावन में दिखी अनोखी आस्था, कोई माता-पिता तो कोई पत्नी और बेटी को कांवड़ में बैठाकर ला रहा गंगाजल

सावन की कांवड़ यात्रा में इस बार श्रद्धा के कई अनोखे रूप देखने को मिल रहे हैं, जहां शिवभक्त अपने परिजनों को कांवड़ में बैठाकर गंगाजल ला रहे हैं.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
सावन में दिखी अनोखी आस्था, कोई माता-पिता तो कोई पत्नी और बेटी को कांवड़ में बैठाकर ला रहा गंगाजल
Courtesy: Chatgpt

हरिद्वार: सावन महीने की कांवड़ यात्रा में इस बार आस्था, सेवा और पारिवारिक समर्पण की कई भावुक तस्वीरें सामने आ रही हैं. हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे कई शिवभक्त श्रवण कुमार की तरह अपने परिजनों को कांवड़ में बैठाकर यात्रा पूरी कर रहे हैं. कोई अपने वृद्ध माता-पिता या नानी को कांवड़ में बैठाकर ला रहा है, तो कोई अपनी पत्नी, बहन, चाची या छोटी बेटी को साथ लेकर पैदल यात्रा कर रहा है. 

श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान शिव की भक्ति के साथ अपने परिवार की सेवा करना भी उनके लिए एक बड़ा धर्म है. कई कांवड़ियों ने बताया कि यह यात्रा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति आभार व्यक्त करने का माध्यम भी है. किसी की पत्नी गंभीर बीमारी से स्वस्थ हुई है तो किसी के बेटे को बीमारी से राहत मिली है. 

अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद श्रद्धालु हरिद्वार से गंगाजल लाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक करने का संकल्प पूरा कर रहे हैं. इस कारण यात्रा में श्रद्धा और उत्साह दोनों देखने को मिल रहे हैं.

दंडवत यात्रा और भारी कांवड़ का बढ़ा आकर्षण

इस बार कांवड़ यात्रा में दंडवत यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी ध्यान आकर्षित कर रही है. कई शिवभक्त कठिन दंडवत यात्रा करते हुए अपने गंतव्य तक पहुंच रहे हैं. वहीं युवाओं में विशाल और भारी कांवड़ लाने का भी उत्साह देखा जा रहा है. भारी कांवड़ उठाने के बावजूद श्रद्धालु पूरे जोश के साथ "बम बम भोले" के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे हैं.

प्रशासन ने क्या की है व्यवस्था?

कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए मुजफ्फरनगर प्रशासन ने जिले के सभी स्कूल और कॉलेज 3 अगस्त से 10 अगस्त तक बंद रखने का फैसला किया है. जिला प्रशासन के निर्देश पर परिषदीय, माध्यमिक, सीबीएसई, आईसीएसई बोर्ड के स्कूलों के साथ सभी सरकारी, निजी, तकनीकी और डिग्री कॉलेजों में अवकाश घोषित किया गया है.

प्रशासन का कहना है कि कांवड़ यात्रा के दौरान प्रमुख मार्गों पर भारी भीड़ और यातायात प्रतिबंध के कारण छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को परेशानी हो सकती है. स्कूल बंद रहने से एक ओर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, वहीं दूसरी ओर कांवड़ियों को भी सुगमता और सुरक्षित वातावरण में यात्रा पूरी करने में सुविधा मिलेगी. अधिकारियों ने सभी शिक्षण संस्थानों को आदेश का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं.