नैनीताल जिले के ज्योलीकोट और आसपास के इलाकों में दूषित पेयजल सप्लाई होने से डायरिया और पीलिया जैसे जलजनित रोग फैल गए. इस गंभीर स्थिति के कारण एक छात्र और एक महिला की मौत हो गई, जबकि सैकड़ों ग्रामीण बीमार हो गए. स्थानीय लोग जून महीने से ही गंदे पानी की आपूर्ति की शिकायत कर रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया.
जनस्वास्थ्य से जुड़ी इस गंभीर लापरवाही का संज्ञान लेते हुए धामी सरकार ने ऐतिहासिक कार्रवाई की है. राज्य गठन के बाद यह पहला मौका है जब जल संस्थान और पेयजल निगम के अधिकारियों पर इतना बड़ा एक्शन लिया गया है. शासन ने जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट के आधार पर लापरवाही बरतने वाले 6 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है.
कार्रवाई के तहत जल संस्थान हल्द्वानी के प्रभारी अधीक्षण अभियंता विशाल कुमार, सहायक अभियंता मोहन सिंह रावत और अपर सहायक अभियंता रवींद्र को निलंबित किया गया है. वहीं, पेयजल निगम भीमताल के प्रभारी अधिशासी अभियंता शशिपाल सिंह, सहायक अभियंता संजय कुमार आर्या और कनिष्ठ अभियंता दीपांशु शर्मा को भी सस्पेंड कर दिया गया है. इसके अलावा नैनीताल के अधिशासी अभियंता अनीश पिल्लई को सख्त चेतावनी दी गई है.
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीडीओ अरविंद पांडे की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की थी. समिति की रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने के बाद यह निलंबन आदेश जारी किया गया. इस पूरे मामले का हाईकोर्ट ने भी स्वतः संज्ञान लिया था. कार्रवाई के बाद जल संस्थान लालकुआं के अधिशासी अभियंता नंदकिशोर को हल्द्वानी के अधीक्षण अभियंता का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है.