देहरादून: उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने स्मार्ट बिजली मीटर को उपभोक्ताओं की सुरक्षा से जोड़ते हुए नई सुविधा शुरू की है. अब स्मार्ट मीटर केवल बिजली की खपत मापने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि घर में होने वाले अर्थ लीकेज का भी तुरंत पता लगाएगा. इसके बाद पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस अलर्ट भेजकर उपभोक्ता को समय रहते सावधान करेगा.
इस पहल का उद्देश्य बिजली से होने वाली दुर्घटनाओं को कम करना और लोगों की सुरक्षा को मजबूत बनाना है. यूपीसीएल के अनुसार यदि किसी घर की विद्युत वायरिंग या किसी बिजली उपकरण में अर्थ लीकेज होता है तो स्मार्ट मीटर उसे तुरंत पहचान लेगा. इसके साथ ही मीटर पर अर्थ लीकेज का संकेत दिखाई देगा और उपभोक्ता के मोबाइल पर तत्काल अलर्ट संदेश पहुंच जाएगा.
इससे लोग समय रहते किसी योग्य इलेक्ट्रीशियन से जांच और मरम्मत कराकर संभावित दुर्घटनाओं से बच सकेंगे. निगम का कहना है कि आधुनिक तकनीक से लैस यह सुविधा बिजली के झटके, शॉर्ट सर्किट और आग लगने जैसी घटनाओं के जोखिम को कम करने में मदद करेगी.
इसके साथ ही अनावश्यक बिजली की खपत पर भी नियंत्रण रहेगा, जिससे ऊर्जा की बचत और बिजली बिल कम रखने में सहायता मिलेगी. यह तकनीक उपभोक्ताओं को अधिक सुरक्षित और जागरूक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
यूपीसीएल ने सभी उपभोक्ताओं से अपील की है कि यदि स्मार्ट मीटर पर अर्थ लीकेज का संकेत दिखाई दे या मोबाइल पर अलर्ट संदेश प्राप्त हो तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज न करें. ऐसी स्थिति में तुरंत बिजली की वायरिंग और उपकरणों की जांच किसी प्रशिक्षित इलेक्ट्रीशियन से कराएं. समय पर की गई जांच किसी बड़े हादसे को टाल सकती है.
ऊर्जा निगम के प्रबंध निदेशक पीसी ध्यानी ने कहा कि निगम का उद्देश्य केवल निर्बाध बिजली आपूर्ति देना नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं को सुरक्षित, आधुनिक और तकनीक आधारित सेवाएं भी उपलब्ध कराना है. उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर की नई सुविधा लोगों की सुरक्षा बढ़ाने के साथ ऊर्जा प्रबंधन को भी अधिक प्रभावी बनाएगी. निगम ने लोगों से स्मार्ट मीटर अपनाने और इसकी सभी सुविधाओं का लाभ उठाने की अपील की है.
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में स्मार्ट मीटर केवल बिजली बिल मापने का साधन नहीं रहेंगे, बल्कि घरेलू सुरक्षा और ऊर्जा प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेंगे. इस नई तकनीक से उपभोक्ताओं को समय पर चेतावनी मिलने के कारण दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी और बिजली व्यवस्था पहले से अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बन सकेगी.