उत्तराखंड में सक्रिय मानसून ने हालात चुनौतीपूर्ण बना दिए हैं. कई जिलों में लगातार बारिश के कारण सड़कें बंद हो गई हैं और भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं. प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए चारधाम यात्रा पर अस्थायी रोक लगा दी है. मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. सरकार और प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों में लगातार जुटे हुए हैं.
राज्य में सोमवार रात से शुरू हुई तेज बारिश मंगलवार तक जारी रही. इसका असर कई जिलों में देखने को मिला. तीन राष्ट्रीय राजमार्ग समेत 140 से अधिक सड़कें बंद हो गईं. देहरादून में नंदा की चौकी के पास पुल की एप्रोच रोड बह गई, जबकि मसूरी में पहाड़ी से मलबा गिरने से एक रेस्तरां क्षतिग्रस्त हो गया. कई इलाकों में यातायात बाधित रहा.
खराब मौसम और यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने 28 और 29 जुलाई के लिए चारधाम यात्रा स्थगित कर दी है. केदारनाथ हाईवे कई स्थानों पर बोल्डर और मलबा आने से बंद रहा. यमुनोत्री पैदल मार्ग का लगभग 30 मीटर हिस्सा धंस गया, जिससे यात्रा रोकनी पड़ी. बदरीनाथ हाईवे भी कंचन नाला के पास बाधित रहा.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी विभागों को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं. अधिकारियों को राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने के साथ प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने को कहा गया है. हेली सेवाओं को भी पूरी तरह तैयार रखा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर दूरस्थ इलाकों तक तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके.
मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों तक पश्चिमी विक्षोभ और सक्रिय मानसूनी प्रणाली के प्रभाव से भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना बनी हुई है. बीते 24 घंटों में देहरादून जिले में 95.8 मिमी बारिश दर्ज की गई. मालदेवता में 233 मिमी और हाथीबड़कला में 194.5 मिमी वर्षा रिकॉर्ड हुई. तापमान में भी करीब चार डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई.
प्रशासन बंद सड़कों को जेसीबी और पोकलेन मशीनों की मदद से जल्द खोलने में जुटा है. लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की अपील की गई है. संवेदनशील इलाकों में रहने वाले नागरिकों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में नुकसान को कम किया जा सक.