देहरादून: उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पर काम तेजी से जारी है. रेल विकास निगम लिमिटेड के अधिकारियों के अनुसार परियोजना का 75 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा किया जा चुका है. पहाड़ी क्षेत्रों में आधुनिक रेल संपर्क स्थापित करने वाली यह परियोजना राज्य के विकास और यातायात व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि कुल 213 किलोमीटर लंबी सुरंगों की खुदाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसमें से अब तक 206 किलोमीटर का कार्य पूरा हो चुका है. इसके साथ ही लगभग 150 किलोमीटर क्षेत्र में सुरंगों की अंतिम लाइनिंग का काम भी पूरा कर लिया गया है. निर्माण कार्य की प्रगति को संतोषजनक बताते हुए अधिकारियों ने कहा कि सभी एजेंसियां तय समयसीमा के भीतर परियोजना को पूरा करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं.
रेल विकास निगम लिमिटेड के डिप्टी जनरल मैनेजर ओमप्रकाश मालगुडी ने बताया कि परियोजना के तहत बनाई जा रही 16 सुरंगों में से 13 में ब्रेकथ्रू सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है. ब्रेकथ्रू वह चरण होता है जब सुरंग के दोनों सिरों की खुदाई आपस में मिल जाती है. हालांकि तीन सुरंगों में अभी यह कार्य शेष है, जिन पर तेजी से काम किया जा रहा है.
#WATCH | Rishikesh, Uttarakhand: Omprakash Malgudi, Deputy General Manager of Rail Vikas Nigam Limited (RVNL), says, "More than 75 per cent of the work on the Rishikesh-Karnprayag Railway Project has been completed. Of the total 213 kilometres of tunnel excavation, 206 kilometres… pic.twitter.com/wn3uD9a4I4
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) June 16, 2026
परियोजना के निर्माण के दौरान सबसे बड़ी चुनौती पहाड़ी क्षेत्रों की भूवैज्ञानिक परिस्थितियां रही हैं. कई स्थानों पर चट्टानों की संरचना और भौगोलिक स्थिति के कारण निर्माण कार्य को विशेष तकनीकी सावधानियों के साथ आगे बढ़ाना पड़ा. इसके बावजूद निर्माण एजेंसियों ने कठिन परिस्थितियों में भी काम की गति बनाए रखी है.
अधिकारियों के अनुसार परियोजना के पहले चरण में जून 2028 तक ब्यासी सेक्शन पर रेल संचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके बाद शेष कार्य पूरा कर दिसंबर 2029 तक पूरी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन को यात्रियों के लिए चालू करने की योजना है.
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पूरी होने के बाद गढ़वाल क्षेत्र की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. इससे यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी, जबकि पर्यटन, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है.