menu-icon
India Daily

मानसून में वन्यजीवों को मिलेगा सुकून, 1 जुलाई से बंद होंगे हाथीडंगर और फाटो पर्यटन जोन

तराई पश्चिमी वन प्रभाग ने वन्यजीव संरक्षण और पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हाथीडंगर और फाटो पर्यटन जोनों को 1 जुलाई से अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया है.

KanhaiyaaZee
मानसून में वन्यजीवों को मिलेगा सुकून, 1 जुलाई से बंद होंगे हाथीडंगर और फाटो पर्यटन जोन
Courtesy: Social Media

नैनीताल: तराई पश्चिमी वन प्रभाग ने मानसून सत्र के दौरान वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित बनाए रखने के उद्देश्य से हाथीडंगर और फाटो पर्यटन जोनों को अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया है. विभाग के अनुसार दोनों पर्यटन जोन 1 जुलाई से पर्यटकों के लिए बंद कर दिए जाएंगे.

वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी प्रकाश आर्या ने बताया कि इन क्षेत्रों में पूरे वर्ष पर्यटकों की आवाजाही बनी रहती है. लगातार मानव गतिविधियों के कारण वन्यजीवों के स्वाभाविक व्यवहार, आवागमन और प्रजनन चक्र पर असर पड़ता है. ऐसे में मानसून काल के दौरान उन्हें अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए यह कदम उठाया गया है.

30 जून तक जारी रहेंगी पर्यटन गतिविधियां

वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि हाथीडंगर और फाटो पर्यटन जोन 30 जून तक नियमित रूप से पर्यटकों के लिए खुले रहेंगे. इसके बाद 1 जुलाई से दोनों क्षेत्रों में पर्यटन से जुड़ी सभी गतिविधियों पर रोक लगा दी जाएगी. विभाग ने प्रारंभिक तौर पर 30 सितंबर तक इन जोनों को बंद रखने का प्रस्ताव तैयार किया है.

मानसून के प्रभाव का किया जाएगा आकलन

बंदी अवधि के दौरान वन विभाग जंगलों की स्थिति, वर्षा के प्रभाव और वन्यजीवों की गतिविधियों का विस्तृत आकलन करेगा. अधिकारियों का मानना है कि मानसून के समय वन्यजीवों को निर्बाध वातावरण उपलब्ध कराना संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है.

मौसम और मार्गों की स्थिति तय करेगी अगला कदम

डीएफओ प्रकाश आर्या के अनुसार यदि मानसून सामान्य रहता है और जंगल के भीतर जाने वाले मार्ग सुरक्षित एवं सुगम पाए जाते हैं, तो 30 सितंबर के बाद पर्यटन जोनों को फिर से खोला जा सकता है. हालांकि यदि लगातार वर्षा या प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियां बनी रहती हैं, तो पर्यटकों को इन क्षेत्रों में प्रवेश के लिए 15 अक्टूबर तक इंतजार करना पड़ सकता है.

पर्यटकों की सुरक्षा भी प्राथमिकता

वन विभाग का कहना है कि यह निर्णय केवल वन्यजीव संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर भी लिया गया है. मानसून के दौरान जंगलों में रास्तों के क्षतिग्रस्त होने, जलभराव और अन्य प्राकृतिक जोखिमों की संभावना बढ़ जाती है, जिससे एहतियात के तौर पर पर्यटन गतिविधियां अस्थायी रूप से बंद की जा रही हैं.