देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में चल रही विकास परियोजनाओं को लेकर सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अब देरी बर्दाश्त नहीं होगी. उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि हर प्रोजेक्ट की समय-सीमा तय है और उस पर अमल भी सुनिश्चित किया जाएगा.
मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि फिलहाल राज्य में 12 महत्वपूर्ण परियोजनाएं प्रगति पर हैं. इन्हें तेज गति से और समयबद्ध तरीके से पूरा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं की नियमित निगरानी होगी और वे स्वयं हर महीने इनकी समीक्षा बैठक करेंगे. यह केवल औपचारिकता नहीं बल्कि जवाबदेही तय करने की दिशा में एक ठोस कदम है.
सीएम धामी ने चमोली, पिथौरागढ़ और सीमावर्ती जिलों में चल रहे कार्यों का विशेष उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि इन संवेदनशील और दुर्गम इलाकों में कई एजेंसियां एक साथ काम कर रही हैं, जिससे तालमेल की चुनौती सामने आती है. इसी को ध्यान में रखते हुए विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने पर गंभीरता से चर्चा हुई. सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास कार्य राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं.
मुख्यमंत्री ने परियोजनाओं में देरी के दुष्परिणामों पर खुलकर बात की. उनका कहना था कि जब कोई प्रोजेक्ट तय समय से आगे खिंचता है तो लागत बढ़ती है, संसाधनों की खपत बढ़ती है और जनता को फायदा पहुंचने में भी विलंब होता है. इसीलिए हर परियोजना के लिए समय-सीमा पहले से निर्धारित की गई है ताकि अफसरशाही की सुस्ती पर लगाम लगाई जा सके.
#WATCH | Dehradun: Uttarakhand CM Pushkar Singh Dhami says, "12 projects are currently underway in the state, the aim is to complete them at a faster pace and in a time-bound manner, with regular monitoring; I will personally review them every month. There are projects in… https://t.co/ia1juB0ttQ pic.twitter.com/qJOPLYvCXx
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) June 8, 2026
धामी ने यह भी स्पष्ट किया कि अलग-अलग विभागों के बीच आपसी तालमेल की कमी अक्सर परियोजनाओं के अटकने की बड़ी वजह बनती है. इस समस्या से निपटने के लिए विभागीय स्तर पर समन्वय की एक सुदृढ़ व्यवस्था बनाई जाएगी. मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि हर विभाग को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और एक-दूसरे के साथ मिलकर चलना होगा.
मुख्यमंत्री धामी का यह कदम उत्तराखंड को विकास की पटरी पर तेजी से दौड़ाने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है. पहाड़ी राज्य होने के कारण यहां बुनियादी ढांचे का विकास न केवल आर्थिक बल्कि सामरिक दृष्टि से भी जरूरी है. समय पर पूरी होने वाली परियोजनाएं न केवल सरकारी धन की बचत करेंगी बल्कि आम जनता की जिंदगी को भी आसान बनाएंगी.