उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत शनिवार को 2016 के ग्राम पंचायत विकास अधिकारी यानी VPDO भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने पेश हुए. देहरादून स्थित ED कार्यालय में उनसे मामले को लेकर पूछताछ की गई. रावत को एजेंसी ने पुराने आयकर रिटर्न और संपत्तियों समेत कई दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए नोटिस भेजा था.
हरीश रावत के मुताबिक, ED के नोटिस में पुराने Income Tax Returns (ITR), परिवार की संपत्तियों और अन्य दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी. उनके कार्यालय के अनुसार, एजेंसी ने उनके निवास, संपत्तियों, बैंक खातों और व्यावसायिक हितों से संबंधित जानकारी भी मांगी थी.
रावत ने ED कार्यालय जाने से पहले बताया कि उन्हें पूछताछ का नोटिस दो दिन पहले मिला था. वह अपनी मां की तस्वीर गले में डालकर ED कार्यालय पहुंचे. उन्होंने कहा कि वह मां, मां जगदंबा और धरती माता का स्मरण करते हुए जांच एजेंसी के सामने पहुंचे हैं.
ED की यह कार्रवाई रावत के तत्कालीन OSD और वर्तमान निजी सहायक चंदन सिंह जीना से जुड़े मामले की जांच के बीच हुई है. ED ने 10 सितंबर को उत्तराखंड के 2016 UKSSSC VPDO परीक्षा मामले में देहरादून में कई स्थानों पर तलाशी ली थी. जीना के परिसर से करीब 32 लाख रुपये की कथित बेहिसाबी नकदी, करीब 200.5 ग्राम सोना और 12 महंगी घड़ियां मिलने की बात ED ने कही थी. इसके अलावा जीना और उनके परिवार से जुड़े बैंक खातों में करीब 52.16 लाख रुपये फ्रीज किए गए थे. ED के अनुसार, कुल करीब 1.28 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त या फ्रीज की गई थी.
यह मामला उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की ओर से 2016 में आयोजित ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है. जांच में कुछ OMR शीट में कथित छेड़छाड़ और चयनित उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाने के आरोपों की जांच की जा रही है. ED ने इसी मामले से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की जांच शुरू की है.
हरीश रावत की ED के सामने पेशी का मतलब अपने आप में यह नहीं है कि उनके खिलाफ आरोप साबित हो गए हैं. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार ED ने उनसे दस्तावेज और मामले से जुड़ी जानकारी मांगी है, जबकि जांच जारी है.