मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को देहरादून के सचिवालय में आयोजित कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा हुई और कुछ को मंजूरी भी दी गई. इस बैठक में उत्तराखंड सरकार ने राज्य में योग को बढ़ावा देने के लिए एक नई योग नीति को हरी झंडी दिखाई. इसके साथ ही, सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए गोल्डन कार्ड योजना को भी स्वीकृति दी गई.
उत्तराखंड, जो पहले से ही योग और आध्यात्मिकता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है अब योग के क्षेत्र में एक नया मुकाम हासिल करने की दिशा में बढ़ रहा है. नई योग नीति के तहत राज्य में टिहरी झील, जागेश्वर, और व्यास घाट जैसे प्रमुख स्थानों पर योगा हब विकसित किए जाएंगे. इन स्थानों को योग केंद्रों के रूप में स्थापित करने के लिए सरकार प्राथमिकता के आधार पर कार्य करेगी.
इस नीति का उद्देश्य योग को न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रचारित करना है. इसके लिए योग संस्थानों को 10 लाख रुपये तक का अनुदान प्रदान किया जाएगा. साथ ही, सभी योग संस्थानों का शत-प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है. सरकार ने ऑनलाइन योग प्लेटफॉर्म विकसित करने की योजना भी बनाई है, जिससे योग को डिजिटल माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सके.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड को योग और आयुर्वेद का वैश्विक केंद्र बनाने का लक्ष्य है. इसके लिए योग के क्षेत्र में शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विशेष अनुदान की व्यवस्था की गई है. यह अनुदान योग संस्थानों और शोधकर्ताओं को नई खोज और तकनीकों को विकसित करने में मदद करेगा. सरकार का मानना है कि यह कदम न केवल योग की लोकप्रियता को बढ़ाएगा, बल्कि उत्तराखंड को पर्यटन और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी एक नई पहचान देगा.
कैबिनेट बैठक में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए गोल्डन कार्ड योजना को भी मंजूरी दी गई. इस योजना के तहत कर्मचारियों और पेंशनर्स को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. उत्तराखंड पहले से ही ऋषिकेश और हरिद्वार जैसे स्थानों के कारण योग की वैश्विक राजधानी के रूप में जाना जाता है.