menu-icon
India Daily

किसके साथ जाएगा साइलेंट वोट? बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा, राजद और जन सुराज में कांटे की टक्कर

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा, राजद और जन सुराज पार्टी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला बन गया है. तीनों दलों ने प्रचार के अंतिम दिन पूरी ताकत लगाई.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
किसके साथ जाएगा साइलेंट वोट? बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा, राजद और जन सुराज में कांटे की टक्कर
Courtesy: Pinterest (Representative image)

बांकीपुर: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव इस बार बेहद दिलचस्प हो गया है. भाजपा की परंपरागत मानी जाने वाली इस सीट पर मुकाबला अब सीधा नहीं बल्कि त्रिकोणीय बन चुका है. भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और जन सुराज पार्टी तीनों ही अपनी जीत को लेकर पूरा जोर लगा रही हैं. 

हालांकि सबसे बड़ी पहेली उन खामोश मतदाताओं को माना जा रहा है, जो खुलकर अपनी पसंद नहीं बता रहे हैं. चुनाव प्रचार के अंतिम दिन तीनों दलों ने पूरी ताकत झोंक दी. मतदान 30 जुलाई को होगा, जबकि मतगणना 3 अगस्त को की जाएगी. राजनीतिक दलों का मानना है कि वास्तविक तस्वीर मतदान के बाद ही साफ होगी.

प्रचार में कौन-कौन उतारा?

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की ओर से भाजपा और जदयू ने अपने सभी प्रमुख नेताओं को प्रचार में उतारा. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, सांसद रविशंकर प्रसाद, मंत्री रामकृपाल यादव समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव प्रचार किया. भाजपा विकास कार्यों, डबल इंजन सरकार और बांकीपुर में हुए कार्यों को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताकर मतदाताओं से समर्थन मांग रही है.

नेता प्रतिपक्ष से मैदान में कौन आया?

दूसरी ओर राजद ने चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव को मैदान में उतारा. विदेश यात्रा से लौटने के बाद उन्होंने दो दिवसीय रोड शो कर कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने और शहरी मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया. राजद रोजगार, महंगाई, छात्र आंदोलन और स्थानीय समस्याओं को प्रमुख चुनावी मुद्दा बना रही है. पार्टी का आरोप है कि सरकार ने चुनाव से पहले किए गए कई वादे पूरे नहीं किए.

जन सुराज पार्टी की क्या है स्थिति?

वहीं, जन सुराज पार्टी खुद को तीसरे मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है. पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने मोहल्ला बैठक, चाय पर चर्चा और घर घर संपर्क अभियान के जरिए मतदाताओं तक पहुंच बनाई. हिंद नगर, बाकरगंज, गोरिया टोली, नाला रोड और योगिया टोली जैसे इलाकों में छोटे समूहों के साथ संवाद कर स्थानीय मुद्दों को चुनाव का केंद्र बनाने का प्रयास किया गया.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार खामोश मतदाता चुनाव परिणाम में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं. यही कारण है कि तीनों दल अंतिम समय तक मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए लगातार संपर्क अभियान चला रहे हैं. अब सभी की नजर 30 जुलाई के मतदान और 3 अगस्त को आने वाले नतीजों पर टिकी है.