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क्या खत्म हो जाएगी दयारा बुग्याल की खूबसूरती? 400 हेक्टेयर में बढ़ता भू-धंसाव बना बड़ा खतरा

उत्तरकाशी के विश्व प्रसिद्ध दयारा बुग्याल में भू धंसाव और भूस्खलन से 400 हेक्टेयर क्षेत्र खतरे में है. वन विभाग विशेषज्ञों के साथ नई संरक्षण योजना तैयार कर रहा है.

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Edited By: Reepu Kumari
क्या खत्म हो जाएगी दयारा बुग्याल की खूबसूरती? 400 हेक्टेयर में बढ़ता भू-धंसाव बना बड़ा खतरा
Courtesy: ChatGpt

उत्तरकाशी का दयारा बुग्याल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और विशाल घास के मैदानों के लिए देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करता है. लेकिन अब यही खूबसूरत बुग्याल एक गंभीर प्राकृतिक संकट का सामना कर रहा है, जिसने स्थानीय लोगों और प्रशासन दोनों की चिंता बढ़ा दी है. बीते कुछ वर्षों में यहां तेजी से बदलते भूगर्भीय हालात ने कई हिस्सों का स्वरूप बदलना शुरू कर दिया है. लगातार हो रहे भू-धंसाव और भूस्खलन के कारण बुग्याल का बड़ा इलाका प्रभावित हो रहा है, जिससे पर्यावरण और आसपास के क्षेत्रों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.

घास के मैदानों में बनने लगीं गहरी खाइयां

समुद्र तल से करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित दयारा बुग्याल में धियाणा, नहेटा, चिलपाड़ा, बरनाला और गोई क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित बताए जा रहे हैं. यहां लगातार हो रहे भू-क्षरण से घास के मैदानों में बड़ी-बड़ी खाइयां बन रही हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले दो-तीन वर्षों में यह समस्या तेजी से बढ़ी है.

भूस्खलन का असर जैव विविधता तक पहुंचा

लगातार हो रहे भू-धंसाव का असर केवल जमीन तक सीमित नहीं है. इससे दयारा बुग्याल की जैव विविधता भी प्रभावित हो रही है. स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि इन क्षेत्रों से बहने वाला मलबा हर वर्ष पापड़गाड नदी तक पहुंचकर आपदा जैसी स्थिति पैदा करता है. कई जंगलों में भी मिट्टी खिसकने से वन संपदा को नुकसान हो रहा है.

पहले सफल रहा संरक्षण का प्रयास

वन विभाग ने वर्ष 2020 में भारतीय वन्यजीव संस्थान और उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के सहयोग से लगभग 600 मीटर क्षेत्र में जूट और नारियल के रेशों से बने केयर नेट तथा पिरूल के चेक डैम लगाए थे. विभाग के अनुसार इस तकनीक से उस क्षेत्र में भू-क्षरण रोकने में सफलता मिली थी, लेकिन अन्य इलाकों में समस्या दोबारा बढ़ गई है.

ग्रामीणों ने उठाई स्थायी समाधान की मांग

स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि भू-धंसाव का असर अब रैथल, क्यारक और आसपास के गांवों के साथ गंगोत्री हाईवे तक महसूस किया जा रहा है. कई स्थानों पर संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है. उन्होंने वन विभाग से पूरे क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक और प्रभावी संरक्षण योजना लागू करने की मांग की है.

विशेषज्ञों के साथ बनेगी नई संरक्षण योजना

उत्तरकाशी वन प्रभाग के डीएफओ डीपी बलूनी के अनुसार विभाग लगातार बुग्याल संरक्षण के लिए कार्य कर रहा है. पहले किए गए सुरक्षात्मक उपायों के सकारात्मक परिणाम मिले हैं. अब भारतीय वन्यजीव संस्थान और अन्य विशेषज्ञों के सहयोग से दयारा बुग्याल के संरक्षण के लिए विस्तृत और दीर्घकालिक योजना तैयार की जा रही है.