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उत्तराखंड में हुई महा-रिहर्सल, नकली आपदा के बीच असली जांबाजों ने बचाई 20 जिंदगियां

उत्तराखंड में मानसून के आगमन के साथ ही संभावित प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए सभी 13 जिलों में व्यापक मॉक ड्रिल की गई. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कंट्रोल रूम से इस पूरी तैयारियों का जायजा लिया और अधिकारियों को तत्परता से काम करने के निर्देश दिए.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
उत्तराखंड में हुई महा-रिहर्सल, नकली आपदा के बीच असली जांबाजों ने बचाई 20 जिंदगियां
Courtesy: ai generated

पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में मानसून का सीजन हमेशा अपने साथ बड़ी चुनौतियां लेकर आता है. इस वर्ष बारिश के मौसम में होने वाले संभावित भूस्खलन, बाढ़ और बादल फटने जैसी आपातकालीन स्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पूरे प्रदेश में एक वृहद राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया. इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य विभिन्न राहत एजेंसियों की रफ्तार, उनके आपसी समन्वय और आधुनिक उपकरणों की कार्यप्रणाली का वास्तविक धरातल पर आंकलन करना था. राज्य के सभी जिलों में संवेदनशील स्थानों को चिह्नित कर प्रशासनिक तंत्र ने इस अभ्यास को सफलतापूर्वक संपन्न किया.

आपदा नियंत्रण कक्ष से मुख्य सारथी की नजर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून स्थित राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुख्य नियंत्रण कक्ष में खुद मौजूद रहकर इस पूरी व्यापक रिहर्सल की बारीकी से निगरानी की. उन्होंने आधुनिक राहत उपकरणों के संचालन को देखा और विभिन्न विभागों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान की गति को परखा. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में हिदायत दी कि वास्तविक संकट के समय बिना एक भी पल गंवाए त्वरित राहत कार्य शुरू होना चाहिए. सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों की जान-माल की शत-प्रतिशत सुरक्षा सुनिश्चित करना है, जिसके लिए पूर्व अनुभवों के आधार पर पुख्ता रणनीति बनाई गई है.

दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर हादसों का कृत्रिम दृश्य

इस मॉक ड्रिल के दौरान लंबीधार-किमाड़ी और चकराता-त्यूनी जैसे दुर्गम मोटर मार्गों पर बेहद चुनौतीपूर्ण और काल्पनिक संकट की स्थितियां तैयार की गईं. कहीं मलबे में यात्रियों से भरी बस के दबे होने तो कहीं गहरी खाई में वाहन के गिरने की सूचनाएं नियंत्रण कक्ष को भेजी गईं. धारनाधार के पास भारी चट्टान गिरने से रास्ता बंद होने का दृश्य बनाया गया, जिसमें कुछ लोग घायल भी दिखाए गए. सूचना मिलते ही एसडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें सायरन बजाती हुई घटनास्थलों पर पहुंचीं और मलबे से लोगों को सकुशल बाहर निकालने का सफल अभ्यास किया.

मैदानी इलाकों में जलभराव और बाढ़ का मुकाबला

पहाड़ों के साथ-साथ मैदानी और तटीय क्षेत्रों में भी नदियों के उफान पर आने की स्थिति में प्रशासनिक सक्रियता को आंका गया. ऋषिकेश के निचले इलाके गौहरी माफी में नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ आने और रास्ते बंद होने की कृत्रिम स्थिति पैदा की गई. राहत दलों ने तुरंत मोटर बोट और नावों का सहारा लेकर पानी में फंसे ग्रामीणों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों तक पहुंचाया. इस दौरान चिकित्सा टीमों द्वारा घायलों को प्राथमिक उपचार देने, भोजन वितरण करने और जलस्तर की निरंतर निगरानी रखने का भी व्यावहारिक अभ्यास किया गया, ताकि बाढ़ के वास्तविक संकट के समय कोई चूक न हो.

सीमांत जिलों और गढ़वाल-कुमाऊं में साझा अभियान

हरिद्वार के पवित्र घाटों से लेकर बागेश्वर और उत्तरकाशी जैसे संवेदनशील सीमांत जिलों में इस मेगा रिहर्सल को पूरी गंभीरता से अंजाम दिया गया. सुबह निर्धारित समय पर सायरन बजते ही समूचा सरकारी अमला सक्रिय हो गया. उत्तरकाशी में पांच अलग-अलग संवेदनशील जगहों पर भूस्खलन और मकान ढहने जैसे दृश्यों के बीच एनडीआरएफ, अग्निशमन, लोक निर्माण विभाग और रेडक्रॉस की टीमों ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाला. इस अभ्यास के जरिए न केवल राहत कार्यों में लगने वाले समय का सटीक मूल्यांकन किया गया, बल्कि दूरदराज के क्षेत्रों में संचार व्यवस्था की मजबूती को भी परखा गया.