उत्तराखंड के कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में वनकर्मियों की सतर्कता और साहस ने एक बड़ा हादसा टाल दिया. गश्त के दौरान बाघ के हमले का शिकार बने एक दैनिक श्रमिक को उसके साथियों ने जान जोखिम में डालकर सुरक्षित बाहर निकाला. घटना के बाद विभाग ने मानसून गश्त को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं.
रामनगर स्थित कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के सर्पदुली रेंज में सोमवार शाम वन विभाग की टीम नियमित गश्त कर रही थी. टीम में वनकर्मी योगेंद्र रावत, नवीन, रामनाथ, मनोज कुमार और दैनिक श्रमिक पीतांबर सौनी शामिल थे. वापसी के दौरान पीतांबर सबसे पीछे चल रहे थे. इसी दौरान झाड़ियों में छिपे बाघ ने अचानक उन पर हमला कर दिया. हमले से वह जमीन पर गिर पड़े और बाघ ने उन्हें दबोचने की कोशिश की. घटना इतनी अचानक हुई कि कुछ पल के लिए पूरे दल में अफरा-तफरी मच गई.
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आगे चल रहे वनकर्मियों ने बिना देर किए मोर्चा संभाल लिया. एक वनकर्मी ने सरकारी हथियार से हवाई फायरिंग की, जबकि अन्य ने जोर-जोर से आवाज लगाई और लाठियां जमीन पर पटककर बाघ को डराने का प्रयास किया. अचानक हुए इस प्रतिरोध से बाघ अपने शिकार को छोड़कर जंगल की ओर भाग गया. इसके बाद घायल पीतांबर को तुरंत सुरक्षित स्थान पर लाया गया और अधिकारियों को सूचना देकर विभागीय वाहन से अस्पताल पहुंचाया गया.
सरकारी अस्पताल में प्राथमिक उपचार के दौरान चिकित्सकों ने पीतांबर के गले के पास पंजों से बने गहरे घाव पाए. बेहतर इलाज के लिए उन्हें काशीपुर के एक निजी अस्पताल रेफर किया गया. पार्क वार्डन बिंदर पाल और सर्पदुली रेंजर संजय पांडे ने अस्पताल पहुंचकर घायल की स्थिति की जानकारी ली. अधिकारियों ने वनकर्मियों की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सूझबूझ से एक बड़ी जनहानि टल गई.
घटना के बाद वन विभाग ने मानसून के दौरान गश्त को लेकर जारी सुरक्षा दिशा-निर्देशों पर फिर से जोर दिया है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि जंगल में कोई भी कर्मचारी अकेले नहीं जाएगा और हर टीम में पांच से छह सदस्य रहेंगे. सभी को हथियार, स्मार्ट स्टिक और लाठी के साथ गश्त करनी होगी. इसके अलावा चलते समय आपसी दूरी कम रखने और विश्राम के दौरान चारों दिशाओं पर नजर बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वन्यजीवों के अचानक हमले से बचाव किया जा सके.