देहरादून: उत्तराखंड में नैनीताल हाईकोर्ट को हल्द्वानी स्थानांतरित करने की लंबे समय से चल रही योजना अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद शासन और जिला प्रशासन ने प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तेज कर दी है. नई योजना में केवल मौजूदा जरूरतों को नहीं, बल्कि अगले 50 वर्षों की न्यायिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आधुनिक हाईकोर्ट परिसर विकसित करने की तैयारी की जा रही है.
जिला प्रशासन ने 14 मई 2026 को शासन को भेजे प्रस्ताव में तराई पूर्वी वन प्रभाग के भाखड़ा रेंज स्थित बेलबाबा मंदिर के पास करीब 40 हेक्टेयर वन भूमि को सबसे उपयुक्त बताया है. यह क्षेत्र राज्य मार्ग-5 से सीधे जुड़ा होने के कारण आवागमन और आधारभूत सुविधाओं के लिहाज से बेहतर माना जा रहा है.
पहले वर्ष 2024 में गौलापार में 20.8 हेक्टेयर भूमि पर 17 जजों की क्षमता वाला परिसर प्रस्तावित था. अब योजना में बड़ा बदलाव किया गया है. नए प्रस्ताव के अनुसार परिसर को 30 जजों तक विस्तार योग्य बनाया जाएगा, ताकि आने वाले दशकों में बढ़ने वाले न्यायिक कार्यभार को आसानी से संभाला जा सके.
प्रस्तावित हाईकोर्ट परिसर में ई-कोर्ट प्रणाली, डिजिटल रिकॉर्ड सेंटर, अधिवक्ताओं के लिए चैंबर, बार भवन, मल्टीलेवल पार्किंग, कॉन्फ्रेंस हॉल और मेडिएशन सेंटर जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इसके अलावा जजों और कर्मचारियों के आवास, बैंक, डाकघर, कैंटीन और हाई सिक्योरिटी कंट्रोल रूम भी बनाए जाने की योजना है.
देहरादून में मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में इस परियोजना की प्रगति और आगे की कार्ययोजना पर चर्चा होने की संभावना है. मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन के अनुसार न्याय विभाग इस प्रस्ताव को कैबिनेट के सामने रखेगा. उन्होंने कहा कि प्रक्रिया जारी है और जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा.
हाईकोर्ट परिसर बनने से हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. होटल, रेस्टोरेंट, किराये के मकानों और स्थानीय व्यापार में तेजी आएगी. साथ ही सड़क, बिजली, पानी और सार्वजनिक परिवहन जैसी सुविधाओं का भी विस्तार होगा. इससे कुमाऊं क्षेत्र के लोगों को आधुनिक न्यायिक सुविधाएं अपने ही क्षेत्र में उपलब्ध हो सकेंगी.