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ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना: सुरंगों में डिजिटल केबलिंग का काम शुरू, आधुनिक तकनीक से लैस होगा रेल संचालन

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में अब सुरंगों के भीतर डिजिटल केबलिंग का काम शुरू हो गया है.

Ashutosh
Edited By: Ashutosh Rai
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना: सुरंगों में डिजिटल केबलिंग का काम शुरू, आधुनिक तकनीक से लैस होगा रेल संचालन
Courtesy: X

उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना अब नए चरण में पहुंच गई है. सुरंगों की खुदाई और अधिकांश निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अब आधुनिक डिजिटल सिस्टम लगाने का काम तेजी से चल रहा है, जिससे भविष्य में सुरक्षित और स्मार्ट रेल संचालन सुनिश्चित किया जाएगा.

सुरंगों में शुरू हुआ आधुनिक डिजिटल सिस्टम का काम

रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) ने परियोजना के तकनीकी ढांचे को मजबूत बनाने के लिए सुरंगों में डिजिटल केबलिंग का काम शुरू कर दिया है. इसके तहत बिजली, हाई-स्पीड फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क, प्रकाश व्यवस्था, संचार और सिग्नल सिस्टम की केबलें बिछाई जा रही हैं. इस काम के लिए दो विशेषज्ञ कंपनियों को जिम्मेदारी दी गई है. परियोजना पूरी होने के बाद पूरी रेल लाइन रीयल-टाइम मॉनिटरिंग, सीसीटीवी निगरानी, ट्रेन कंट्रोल सिस्टम और इमरजेंसी कम्युनिकेशन जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस होगी.

119 किलोमीटर सुरंगों में बनेगा मजबूत नेटवर्क

करीब 125 किलोमीटर लंबी इस रेल परियोजना का लगभग 119 किलोमीटर हिस्सा सुरंगों के भीतर से गुजरता है. इसमें देवप्रयाग-जनासू के बीच देश की सबसे लंबी 14.58 किलोमीटर रेल सुरंग भी शामिल है. पहाड़ी इलाकों को ध्यान में रखते हुए सुरंगों में बिजली, इंटरनेट और सिग्नल सिस्टम के लिए अलग-अलग डक्ट तैयार किए गए हैं. इससे किसी एक नेटवर्क में खराबी आने पर बाकी सेवाएं प्रभावित नहीं होंगी और मरम्मत का काम भी आसानी से किया जा सकेगा. पूरी लाइन पर हाई-स्पीड फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क लगाया जा रहा है, जिससे ट्रेन संचालन पहले से ज्यादा सुरक्षित और तेज होगा.

नई तकनीक से होगा सुरक्षित रेल संचालन

सुरंगों में केबल बिछाने के लिए मोटराइज्ड विंच, केबल पुशर, रोलर सिस्टम और बड़े केबल ड्रम जैसी आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है. साथ ही आर्मर्ड, वाटरप्रूफ और फ्लेम-रिटार्डेंट लो-स्मोक (FRLS) केबलें लगाई जा रही हैं. ये केबल आग लगने की स्थिति में कम धुआं छोड़ती हैं और नमी जैसी कठिन परिस्थितियों में भी बेहतर तरीके से काम करती हैं. अधिकारियों का कहना है कि परियोजना का लगभग 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और अब तकनीकी काम तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि उत्तराखंड को जल्द ही एक आधुनिक रेल सुविधा मिल सके.