उत्तराखंड में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा के आगमन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक संदेश साझा कर देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री के आगमन पर प्रसन्नता व्यक्त की. मुख्यमंत्री के संदेश में उत्तराखंड की लोक संस्कृति, समृद्ध परंपराओं और सनातन आध्यात्मिक विरासत का विशेष रूप से उल्लेख किया गया. उन्होंने कहा कि ऐसी पावन धरा पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री का स्वागत करना उनके लिए सम्मान की बात है.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के स्वागत में संदेश पोस्ट किया. उन्होंने लिखा कि लोक संस्कृति, समृद्ध परंपराओं और सनातन आध्यात्मिक चेतना की अमूल्य विरासत को संजोए देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरती पर केंद्रीय मंत्री का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन है.
लोक संस्कृति एवं समृद्ध परंपराओं और सनातन आध्यात्मिक चेतना की अमूल्य विरासत को संजोए देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरा पर आदरणीय केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री @JPNadda जी का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन। pic.twitter.com/ASypHOepnE
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) June 27, 2026
अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड को केवल प्राकृतिक सुंदरता का प्रदेश नहीं, बल्कि समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की भूमि बताया. उन्होंने राज्य की लोक संस्कृति और सनातन परंपराओं का उल्लेख करते हुए उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान को रेखांकित किया.
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री के राज्य आगमन को महत्वपूर्ण बताते हुए उनका आत्मीय स्वागत किया. उन्होंने अपने संदेश के माध्यम से सम्मान और शुभकामनाएं व्यक्त कीं. हालांकि पोस्ट में दौरे के कार्यक्रम या अन्य गतिविधियों का कोई उल्लेख नहीं किया गया.
मुख्यमंत्री का स्वागत संदेश उनके आधिकारिक एक्स हैंडल पर साझा किया गया. पोस्ट सामने आने के बाद यह संदेश सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना. इसमें मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और देवभूमि की पहचान को प्रमुखता से रखा.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संदेश का समापन केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के हार्दिक स्वागत और अभिनंदन के साथ किया. उन्होंने उत्तराखंड की पावन धरती पर उनके आगमन को सम्मान का अवसर बताया और राज्य की सांस्कृतिक परंपराओं के अनुरूप उनका स्वागत किया.