उत्तर प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आ सकती है. बिजली की नई दरों को लेकर लंबे समय से चल रही प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है. माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग कभी भी नई टैरिफ दरों की घोषणा कर सकता है. सूत्रों के अनुसार, इस बार भी बिजली दरों में बढ़ोतरी की संभावना बेहद कम है. यदि ऐसा होता है तो लगातार सातवें वर्ष बिजली की दरें नहीं बढ़ने का रिकॉर्ड बनेगा. नई टैरिफ दरों के साथ उपभोक्ताओं से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण फैसलों का भी ऐलान होने की उम्मीद है.
बिजली कंपनियों की ओर से दाखिल प्रस्तावों पर नियामक आयोग मार्च और अप्रैल में सुनवाई पूरी कर चुका है. इसके बाद राज्य सलाहकार समिति की बैठक भी हो चुकी है. हालांकि नियमानुसार दरों की घोषणा पहले हो जानी चाहिए थी, लेकिन अब आयोग जल्द अंतिम फैसला जारी कर सकता है.
पावर कॉरपोरेशन और वितरण कंपनियों ने वर्ष 2024-25 के ट्रू-अप और वर्ष 2026-27 के अनुमानित राजस्व अंतर को मिलाकर लगभग 16,448 करोड़ रुपये का अंतर बताया है. इसी आधार पर बिजली दरें बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया था. साथ ही स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना का खर्च भी उपभोक्ताओं पर डालने का प्रस्ताव दिया गया, जिस पर उपभोक्ता संगठनों ने आपत्ति जताई.
आने वाले टैरिफ आदेश में केवल बिजली की नई दरें तय नहीं होंगी. बहुमंजिला इमारतों के साझा बिजली खर्च की पारदर्शिता, घरों में छोटी दुकानों के लिए घरेलू कनेक्शन की अनुमति और स्मार्ट मीटर का खर्च उपभोक्ताओं पर न डालने जैसे मुद्दों पर भी फैसला आने की संभावना है.
नियामक आयोग ने स्पष्ट किया है कि पावर कॉरपोरेशन पुराने बकाया भुगतान की राशि को बिजली बिल में ईंधन अधिभार के रूप में नहीं जोड़ सकता. आयोग के अनुसार केवल संबंधित महीने में ईंधन, ऊर्जा खरीद और ट्रांसमिशन पर हुए वास्तविक खर्च के आधार पर ही अतिरिक्त शुल्क लिया जा सकता है.
आयोग के फैसले के बाद पिछले 14 महीनों में वसूले गए ईंधन अधिभार शुल्क की समीक्षा की जाएगी. इस दौरान अतिरिक्त वसूली गई राशि पर भी निर्णय लिया जाएगा. उपभोक्ताओं की नजर अब नई बिजली दरों और आयोग के अंतिम आदेश पर टिकी है, जिससे लाखों परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है.