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प्रदेश सरकार की योजना से निर्माण श्रमिकों को मिला बड़ा सहारा, मुसीबत में मिली 28 करोड़ की आर्थिक मदद

उत्तर प्रदेश सरकार ने निर्माण कामगारों के लिए एक बेहतरीन योजना शुरू की है. 'निर्माण कामगार मृत्यु एवं दिव्यांगता सहायता योजना' के तहत श्रमिकों और उनके परिवार वालों को आर्थिक मदद दी जा रही है.

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Edited By: Antima Pal
प्रदेश सरकार की योजना से निर्माण श्रमिकों को मिला बड़ा सहारा, मुसीबत में मिली 28 करोड़ की आर्थिक मदद
Courtesy: Pinterest

मेरठ: मुसीबत के समय में उत्तर प्रदेश सरकार ने निर्माण कामगारों के लिए एक बेहतरीन योजना शुरू की है. 'निर्माण कामगार मृत्यु एवं दिव्यांगता सहायता योजना' के तहत श्रमिकों और उनके परिवार वालों को आर्थिक मदद दी जा रही है. इस योजना ने अब तक मेरठ जिले में 1500 श्रमिकों और उनके आश्रितों को 28 करोड़ 25 लाख 74 हजार रुपये से ज्यादा की सहायता पहुंचाई है.

प्रदेश सरकार की योजना से निर्माण श्रमिकों को मिला बड़ा सहारा

इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि पंजीकृत श्रमिकों को दुर्घटना में मौत हो जाने पर पांच लाख रुपये और सामान्य मौत पर दो लाख रुपये दिए जाते हैं. अगर कोई श्रमिक काम के दौरान दिव्यांग हो जाता है तो भी मदद मिलती है. पूरी तरह से 100 प्रतिशत दिव्यांगता पर चार लाख रुपये, 50 प्रतिशत से ज्यादा दिव्यांगता पर तीन लाख रुपये और 25 प्रतिशत दिव्यांगता पर दो लाख रुपये की सहायता दी जाती है. इस मदद से श्रमिकों के इलाज और परिवार की देखभाल में बड़ी राहत मिल रही है.

अनपंजीकृत श्रमिकों को भी लाभ

सरकार ने सिर्फ पंजीकृत श्रमिकों तक ही मदद सीमित नहीं रखी है. अगर कोई अनपंजीकृत निर्माण श्रमिक काम की जगह पर दुर्घटना में मारा जाता है तो उसके परिवार को एक लाख रुपये की सहायता और अंतिम संस्कार के लिए 25 हजार रुपये दिए जाते हैं. इससे पता चलता है कि सरकार हर श्रमिक की चिंता कर रही है.

आंकड़ों में मदद की तस्वीर

उपश्रमायुक्त कार्यालय के अनुसार पिछले वित्तीय वर्ष में 598 श्रमिकों और उनके आश्रितों को करीब 6 करोड़ 6 लाख 25 हजार रुपये की राशि दी गई. जबकि कुल मिलाकर अब तक 28 करोड़ 25 लाख 74 हजार रुपये बांटे जा चुके है. पिछले दो महीनों में ही दो श्रमिकों को साढ़े चार लाख रुपये की मदद पहुंचाई गई है.

उपश्रमायुक्त राजेश मिश्रा ने बताया- 'मुसीबत के समय यह योजना श्रमिकों के लिए बड़ी राहत बनकर उभरी है. निर्माण कार्य में लगे मजदूरों को तुरंत पंजीकरण करा लेना चाहिए ताकि उन्हें और उनके परिवार को समय पर आर्थिक सहायता मिल सके.'