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धामी का धमाका! टनकपुर में 3300 करोड़ खर्च कर बन रहा है 'नया आध्यात्मिक वाटिकन', शारदा नदी पर भव्य आरती घाट बनाने की तैयारी

उत्तराखंड सरकार टनकपुर में ₹3300 करोड़ की लागत से शारदा रिवरफ्रंट और भव्य आरती घाट विकसित करने जा रही है इससे स्थानीय रोजगार, व्यापार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी नई रफ्तार मिलेगी.

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Edited By: Reepu Kumari
धामी का धमाका! टनकपुर में 3300 करोड़ खर्च कर बन रहा है 'नया आध्यात्मिक वाटिकन', शारदा नदी पर भव्य आरती घाट बनाने की तैयारी
Courtesy: @pushkardhami

उत्तराखंड सरकार ने सीमांत क्षेत्र टनकपुर को नई पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की है कि यहां ₹3300 करोड़ की लागत से शारदा रिवरफ्रंट और भव्य आरती घाट का निर्माण किया जाएगा. सरकार का लक्ष्य इस क्षेत्र को धार्मिक और पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करना है. सरकार का कहना है कि यह परियोजना केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आधुनिक आधारभूत सुविधाओं, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था को एक साथ जोड़ने का काम करेगी. इसके पूरा होने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होने के साथ क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है.

टनकपुर को मिलेगी नई पहचान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने एक्स हैंडल पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि टनकपुर में बनने वाला शारदा रिवरफ्रंट और भव्य आरती घाट शहर की तस्वीर बदल देगा. सरकार इस परियोजना के जरिए धार्मिक आस्था और आधुनिक विकास का संतुलित मॉडल तैयार करना चाहती है. इससे टनकपुर को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की संभावना जताई गई है.

धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

सरकार का मानना है कि शारदा नदी के किनारे विकसित होने वाला यह रिवरफ्रंट श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण बनेगा. भव्य आरती घाट धार्मिक आयोजनों को नई भव्यता देगा. इसके साथ ही आधुनिक सुविधाओं के विकास से देशभर से आने वाले पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलेगा, जिससे पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होने की उम्मीद है.

रोजगार और कारोबार को मिलेगी रफ्तार

इस महत्वाकांक्षी योजना का सीधा लाभ स्थानीय लोगों को मिलने की संभावना है. सरकार का कहना है कि परियोजना के निर्माण और संचालन के दौरान रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. होटल, परिवहन, व्यापार और अन्य स्थानीय सेवाओं से जुड़े लोगों की आय बढ़ने के साथ क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.

सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा नया मंच

परियोजना का उद्देश्य केवल बुनियादी ढांचा तैयार करना नहीं है, बल्कि टनकपुर की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को भी नई पहचान देना है. सरकार इसे एक ऐसे केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है, जहां आस्था, संस्कृति और आधुनिक सुविधाएं एक साथ दिखाई दें. इससे शहर का समग्र विकास सुनिश्चित करने की योजना है.

विश्वस्तरीय आध्यात्मिक केंद्र बनाने की तैयारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार, ₹3300 करोड़ की इस परियोजना के माध्यम से टनकपुर को विश्वस्तरीय आध्यात्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा. सरकार का विश्वास है कि यह योजना उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई देने के साथ स्थानीय विकास और आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूत आधार प्रदान करेगी.