नई दिल्ली: ईरान के साथ तनाव कम होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना ध्यान एक बार फिर वैश्विक व्यापार विवादों की ओर मोड़ दिया है. उन्होंने यूरोपीय देशों को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि वे अमेरिकी कंपनियों पर डिजिटल सेवा कर लागू करते हैं तो अमेरिका उनके सभी उत्पादों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकता है. ट्रंप के इस बयान ने अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच पहले से चल रहे व्यापारिक तनाव को और बढ़ा दिया है तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई चर्चाओं को जन्म दिया है.
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा कि कई यूरोपीय देश अमेरिकी तकनीकी कंपनियों पर डिजिटल सेवा कर लगाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. उनके अनुसार यदि किसी देश ने ऐसा कदम उठाया तो अमेरिका उस देश से आने वाले सभी उत्पादों पर तत्काल प्रभाव से 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने पर विचार करेगा. ट्रंप का कहना है कि अमेरिकी कंपनियों पर अतिरिक्त कर लगाना अनुचित है और इससे अमेरिकी कारोबार को नुकसान पहुंच सकता है. इसी वजह से उन्होंने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाने का संकेत दिया है.
ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई देश डिजिटल सेवा कर लागू करता है तो इससे अमेरिका के साथ हुए व्यापारिक समझौते भी प्रभावित हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि चाहे कोई समझौता लागू हो चुका हो या केवल हस्ताक्षरित हुआ हो, नए टैरिफ उसके प्रभाव को समाप्त कर सकते हैं. इससे अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच पहले से बने व्यापारिक संतुलन पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान वैश्विक व्यापारिक माहौल में अनिश्चितता पैदा कर सकते हैं.
रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका ने यूरोपीय देशों को अपने व्यापारिक नियमों में बदलाव के लिए एक समय सीमा भी दी है. ट्रंप प्रशासन का मानना है कि अमेरिकी उत्पादों और कंपनियों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए. इसी कारण यूरोपीय देशों पर अपने कर ढांचे और व्यापार नीतियों की समीक्षा का दबाव बढ़ गया है. हालांकि यूरोपीय नेतृत्व ने अब तक इस मुद्दे पर कोई नरमी नहीं दिखाई है और अपने आर्थिक हितों की रक्षा की बात दोहराई है.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन पहले ही साफ कर चुके हैं कि उनका देश अमेरिकी दबाव में आकर डिजिटल सेवा कर वापस नहीं लेगा. यह कर मुख्य रूप से ऑनलाइन विज्ञापन और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी सेवाओं पर लागू होता है. ट्रंप ने पहले भी फ्रांस के खिलाफ कड़े कदम उठाने की चेतावनी दी थी. अब दोनों पक्षों के बीच बढ़ती बयानबाजी से यह संकेत मिल रहा है कि आने वाले समय में अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापारिक विवाद और गहरा सकता है.