उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम के दौरान नोएडा से जुड़े पुराने राजनीतिक 'टोटके' का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय ऐसा था, जब मुख्यमंत्री नोएडा आने से बचते थे. यह माना जाता था कि जो मुख्यमंत्री नोएडा जाता है, उसकी कुर्सी चली जाती है. योगी ने कहा कि वर्ष 2017 में जब उन्होंने नोएडा जाने का कार्यक्रम बनाया, तब उन्हें भी ऐसा करने से मना किया गया था. इस पर उनका जवाब था, "जो कुर्सी कल जानी है, आज चली जाए, लेकिन जनता की सुनवाई जरूर होगी."
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने अंधविश्वास या राजनीतिक धारणाओं की बजाय जनता के हित को प्राथमिकता दी. उन्होंने सवाल उठाया कि 2017 से पहले भी उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री थे, लेकिन वे नोएडा क्यों नहीं जाते थे. योगी ने कहा कि कुछ नेताओं को अपनी कुर्सी बचाने की चिंता थी, जबकि उनकी सरकार ने जनता के बीच जाकर विकास कार्यों को आगे बढ़ाया. उन्होंने दावा किया कि जनता की सेवा करने वाले नेतृत्व को ऐसे टोटकों से डरने की जरूरत नहीं होती.
हमने कहा- जो कुर्सी कल जानी है, वह आज चली जाए...
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) August 7, 2026
लेकिन जनता के लिए आए हैं, जनता की सुनवाई करेंगे... pic.twitter.com/cLLnJyqbM9
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी तीखा राजनीतिक हमला बोला. उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि विपक्षी नेता देर से उठते हैं, फिर दिनभर सोशल मीडिया और अन्य गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं. योगी ने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग खुद अपने कामकाज को व्यवस्थित नहीं कर पाते, वे राज्य का प्रभावी नेतृत्व कैसे कर सकते हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति कमजोर थी.
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में संभल की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी से जुड़े एक व्यक्ति ने वहां दंगा फैलाने की कोशिश की थी. उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने कानून के दायरे में रहकर ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है. योगी ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा और किसी भी तरह की हिंसा या अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
यह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा से जुड़े इस राजनीतिक मिथक का उल्लेख किया हो. इससे पहले भी कई सार्वजनिक मंचों पर वह इस विषय पर अपनी राय रख चुके हैं. मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने नोएडा समेत उन कई जिलों का दौरा किया, जहां पूर्व में मुख्यमंत्री के न जाने की राजनीतिक मान्यता प्रचलित रही थी. योगी का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनसेवा किसी भी राजनीतिक अंधविश्वास से अधिक महत्वपूर्ण है.