उत्तर प्रदेश में अगले दो महीनों के दौरान राज्यसभा और विधान परिषद की सीटों को लेकर सियासी गतिविधियां तेज रहने वाली हैं.
राज्यसभा की 10 सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को पूरा होगा. इनमें बीजेपी की आठ, सपा की एक और बसपा की एक सीट शामिल है.
37 विधायकों के आसपास होगा एक सीट का गणित
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं, लेकिन कुछ विधायकों के निधन के कारण वर्तमान संख्या 397 बताई जा रही है. मौजूदा आंकड़ों के आधार पर राज्यसभा की एक सीट के लिए करीब 37 विधायकों के प्रथम वरीयता वोट की जरूरत पड़ सकती है. अंतिम कोटा चुनाव के समय वैध मतों और रिक्त सीटों के आधार पर तय होगा.
राज्यसभा चुनाव में विधायक वरीयता क्रम के आधार पर मतदान करते हैं. ऐसे में केवल सीधे संख्याबल के बजाय अतिरिक्त वोटों का इस्तेमाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है. विधानसभा आंकड़ों के मुताबिक बीजेपी के पास 256 विधायक हैं. सहयोगी दलों को मिलाकर एनडीए की संख्या करीब 289 बताई जा रही है. तीन निर्दलीय विधायकों और राजा भैया की पार्टी के दो विधायकों के समर्थन को जोड़ने पर यह आंकड़ा करीब 294 तक पहुंचता है. हालांकि, सुभासपा के दो विधायकों के सपा के करीब होने की वजह से एनडीए की प्रभावी ताकत करीब 292 मानी जा रही है. इस गणित में एनडीए सात सीटों के लिए जरूरी संख्या जुटा सकता है और उसके बाद भी कुछ वोट बचने की स्थिति बनती है.
सपा के पास 101 विधायक बताए जा रहे हैं. इस संख्या के आधार पर पार्टी दो राज्यसभा सीटों के लिए जरूरी वोट जुटा सकती है और कुछ अतिरिक्त वोट भी बच सकते हैं. यही अतिरिक्त वोट चुनाव में दूसरी वरीयता के समीकरण को महत्वपूर्ण बना सकते हैं. बसपा की विधानसभा में कोई सीट नहीं है. ऐसे में रामजी गौतम का कार्यकाल पूरा होने के बाद पार्टी का राज्यसभा में भी प्रतिनिधित्व खत्म होने की स्थिति बन सकती है. राज्यसभा चुनाव का कार्यक्रम अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में घोषित होने की संभावना जताई जा रही है. अधिसूचना से लेकर मतदान और मतगणना तक की प्रक्रिया आमतौर पर सीमित समय में पूरी होती है. इसके साथ ही विधान परिषद की 11 सीटों को लेकर भी अक्टूबर-नवंबर में गतिविधियां बढ़ने की संभावना है.