उत्तराखंड में NEET-UG के जरिए MBBS दाखिले से जुड़े फर्जी प्रमाणपत्र मामले की जांच अब आगे बढ़ गई है. पुलिस ने दो आरोपियों को पकड़ा है. आरोप है कि फ्रीडम फाइटर आश्रित कोटे का प्रमाणपत्र बनवाकर मेडिकल सीट दिलाने के लिए बड़ी रकम मांगी गई. मामले में SIT जांच भी जारी है.
मामला तब सामने आया जब फ्रीडम फाइटर आश्रित कोटे के प्रमाणपत्रों की जांच में गड़बड़ी मिली. चार छात्राओं ने एक ही फ्रीडम फाइटर धर्मवीर वर्मा के नाम से जुड़े दस्तावेज लगाकर MBBS में दाखिला लिया था. सरकारी रिकॉर्ड की जांच में संबंधित नाम का प्रमाण नहीं मिला और दिए गए पते भी सही नहीं पाए गए. इसके बाद चारों प्रमाणपत्र रद्द किए गए और उनके आधार पर मिले दाखिले भी खत्म कर दिए गए. बाद में पुलिस ने रायपुर और क्लेमेंट टाउन थानों में मामले दर्ज किए.
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में रूपेश पंडित की इस मामले में अहम भूमिका बताई जा रही है. वह करीब पांच साल से मेरठ में MECODO पाठशाला नाम से एजुकेशन कंसल्टेंसी चला रहा था. आरोप है कि इसके जरिए प्राइवेट यूनिवर्सिटी और विदेशों में MBBS समेत कई कोर्स में दाखिले कराए जाते थे. पुलिस के अनुसार फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए MBBS सीट दिलाने के लिए 45 लाख रुपये मांगे गए और तीन अभ्यर्थियों के परिवारों से 20-20 लाख रुपये एडवांस लिए गए.
मामले की जांच के लिए बनाई गई SIT अब यह पता लगा रही है कि फर्जी दस्तावेज तैयार होने के बाद वे सरकारी सत्यापन प्रक्रिया तक कैसे पहुंचे. टीम ने मेडिकल कॉलेजों और SDM कार्यालय से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले हैं और राजस्व अधिकारियों से पूछताछ की है. धर्मवीर वर्मा के परिवार से भी जानकारी ली गई है. पुलिस यह जांच रही है कि आवेदन से लेकर प्रमाणपत्र जारी होने तक किन-किन स्तरों पर जांच हुई और किसी सरकारी कर्मचारी की भूमिका थी या नहीं.