8वें वेतन आयोग से कर्मचारियों को सिर्फ वेतन बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है, बल्कि रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन भी बड़ा मुद्दा है. कई कर्मचारी संगठन NPS में बदलाव या पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली की मांग उठा रहे हैं. आयोग इन सुझावों पर विचार कर अपनी सिफारिशें सरकार को देगा.
कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि रिटायरमेंट के बाद निश्चित आय की सुरक्षा कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए बेहद जरूरी है. इसी वजह से कई संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के सामने पुरानी पेंशन योजना यानी OPS को फिर लागू करने की मांग रखी है. सर्वे ऑफ इंडिया की MSA ने अंतिम वेतन के 50 फीसदी के बराबर गारंटीड पेंशन की मांग भी उठाई है. हालांकि, यह संगठनों का प्रस्ताव है, आयोग या सरकार का घोषित फैसला नहीं.
कुछ कर्मचारी संगठन केवल OPS की वापसी की मांग तक सीमित नहीं हैं. फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन ने NPS और UPS के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को भी परिभाषित लाभ वाली पेंशन व्यवस्था में शामिल करने का सुझाव दिया है. रेलवे से जुड़े एक संगठन ने भी रिटायरमेंट के बाद न्यूनतम गारंटीड पेंशन और बेहतर वित्तीय सुरक्षा की मांग रखी है. ऐसे सुझाव आयोग को दिए गए ज्ञापनों का हिस्सा हैं.
8वें वेतन आयोग के सामने फिटमेंट फैक्टर, वेतन संशोधन, भत्तों में बदलाव, न्यूनतम पेंशन और पेंशन समानता जैसे कई मुद्दे रखे गए हैं. आयोग ने कर्मचारियों, पेंशनरों और संगठनों से सुझाव मांगे थे और ऑनलाइन ज्ञापन जमा करने की प्रक्रिया भी शुरू की थी. इन सुझावों के आधार पर आयोग अलग-अलग मांगों और उनके वित्तीय असर का अध्ययन करेगा.
केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन किया था और उसे अपनी रिपोर्ट देने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है. आयोग की अध्यक्षता न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं. आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर सितंबर में पुडुचेरी और चंडीगढ़ की बैठकें तथा अक्टूबर में बेंगलुरु दौरे की जानकारी दी गई है. अंतिम सिफारिशों के बाद ही OPS, NPS, UPS, वेतन और पेंशन से जुड़े बदलावों की तस्वीर साफ होगी.