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India Daily

'हर बच्चे के हाथ में किताब...आंखों में सपना', विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर मुख्यमंत्री योगी का खास संदेश

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बच्चों को सुरक्षित, शिक्षित और सम्मानजनक वातावरण देने का आह्वान किया.

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Edited By: Reepu Kumari
'हर बच्चे के हाथ में किताब...आंखों में सपना', विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर मुख्यमंत्री योगी का खास संदेश
Courtesy: @myogiadityanath

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें शिक्षा से जोड़ने का संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि हर बच्चे के हाथ में किताब और आंखों में सपना होना चाहिए. अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं, जो बताते हैं कि दुनिया भर में करोड़ों बच्चे आज भी बाल श्रम और खतरनाक कार्यों में लगे हुए हैं.

बच्चों के सपनों को बचाने का संदेश

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया. उन्होंने अपने सामाजिक मंच पर लिखा कि हर बच्चे को सुरक्षित वातावरण, शिक्षा और सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार मिलना चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना केवल सरकार का नहीं बल्कि पूरे समाज का दायित्व है. उन्होंने सभी लोगों से बाल श्रम के खिलाफ जागरूक होने और बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का संकल्प लेने की अपील की.

शिक्षा से ही बनेगा मजबूत भविष्य

मुख्यमंत्री के संदेश में यह स्पष्ट दिखाई दिया कि बच्चों का भविष्य किताबों और शिक्षा से बनता है, मजदूरी से नहीं. उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की असली ताकत उसके बच्चे होते हैं. यदि बचपन सुरक्षित रहेगा तो आने वाला कल भी मजबूत होगा. यही वजह है कि बच्चों को सम्मानपूर्ण माहौल और बेहतर अवसर देना समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है.

दो दशक पहले शुरू हुई थी वैश्विक पहल

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस की शुरुआत अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा वर्ष 2002 में की गई थी. इस दिवस का उद्देश्य दुनिया का ध्यान बाल श्रम जैसी गंभीर समस्या की ओर आकर्षित करना है. इसके माध्यम से सरकारों, संस्थाओं और समाज को यह याद दिलाया जाता है कि बच्चों को श्रम नहीं बल्कि शिक्षा और सुरक्षित बचपन मिलना चाहिए. हर साल इस दिन जागरूकता अभियान भी चलाए जाते हैं.

लड़के और लड़कियां दोनों प्रभावित

बाल श्रम का असर केवल एक वर्ग तक सीमित नहीं है. अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार खतरनाक श्रम में करोड़ों लड़के और लड़कियां शामिल हैं. विशेष चिंता की बात यह है कि पांच से ग्यारह वर्ष की आयु वाले बच्चों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है. इतनी कम उम्र में श्रम करना उनके भविष्य और शिक्षा दोनों के लिए बड़ा खतरा माना जाता है.

अब जरूरी है ठोस संकल्प

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संदेश ऐसे समय आया है जब दुनिया अभी भी बाल श्रम की चुनौती से जूझ रही है. करोड़ों बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए जरूरी है कि उन्हें स्कूलों तक पहुंचाया जाए और हर प्रकार के शोषण से बचाया जाए. बच्चों के हाथों में औजार नहीं, किताबें हों और उनकी आंखों में सपने हों, यही इस दिवस का सबसे बड़ा संदेश है.

समाज की भूमिका सबसे अहम

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है. बाल श्रम को समाप्त करने के लिए समाज, परिवार, स्कूल और प्रशासन को मिलकर काम करना होगा. बच्चों को शिक्षा, पोषण और सुरक्षा उपलब्ध कराना ही इस समस्या का स्थायी समाधान माना जाता है. विश्व बाल श्रम निषेध दिवस इसी दिशा में जागरूकता बढ़ाने और सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का संदेश देता है.