उत्तर प्रदेश में परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने वाली दिल्ली वाराणसी हाईस्पीड रेल परियोजना अब तेजी से आगे बढ़ रही है. इस योजना के तहत लखनऊ में बनने वाले बुलेट ट्रेन स्टेशन के लिए चार संभावित स्थानों की पहचान कर ली गई है. अब प्रशासन और संबंधित विभाग इन विकल्पों का विस्तृत अध्ययन कर रहे हैं ताकि यात्रियों के लिए सबसे उपयुक्त और सुविधाजनक स्थान का चयन किया जा सके. यह परियोजना पूरी होने के बाद उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख शहरों की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. खासकर दिल्ली, लखनऊ, अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा.
लखनऊ में हाईस्पीड रेल स्टेशन के लिए चार प्रमुख स्थानों पर विचार किया जा रहा है. इनमें शहीद पथ और किसान पथ एक्सप्रेसवे क्षेत्र, वृंदावन योजना का जी 20 ग्राउंड, इकाना स्टेडियम के आसपास का इलाका और गोमती रिवरफ्रंट शामिल हैं. इन सभी स्थानों का अलग अलग दृष्टिकोण से मूल्यांकन किया जा रहा है. अधिकारियों का उद्देश्य ऐसा स्थान चुनना है जहां यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिले और निर्माण कार्य के दौरान कम से कम बाधाएं आएं.
स्टेशन के अंतिम चयन को लेकर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. बैठक में लखनऊ विकास प्राधिकरण समेत कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया. इस दौरान भूमि अधिग्रहण, यातायात व्यवस्था, निर्माण लागत, भविष्य की कनेक्टिविटी और शहरी विकास पर पड़ने वाले प्रभाव जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई. आने वाले दिनों में लखनऊ मेट्रो और अन्य एजेंसियों के साथ भी बैठक प्रस्तावित है.
प्रारंभिक आकलन में शहीद पथ किसान पथ एक्सप्रेसवे क्षेत्र और इकाना स्टेडियम के आसपास का इलाका सबसे व्यवहारिक विकल्पों के रूप में उभरकर सामने आया है. एक्सपर्ट का मानना है कि इन क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण की चुनौती अपेक्षाकृत कम है. इसके अलावा निर्माण कार्य के दौरान शहर की मौजूदा यातायात व्यवस्था और सार्वजनिक सुविधाओं पर भी कम असर पड़ने की संभावना है. यही वजह है कि इन दोनों स्थानों को प्राथमिकता मिलने की चर्चा है.
हालांकि गोमती रिवरफ्रंट और वृंदावन योजना भी महत्वपूर्ण विकल्पों में शामिल हैं, लेकिन इन स्थानों पर कुछ तकनीकी चुनौतियां मौजूद हैं. वृंदावन योजना क्षेत्र में एसजीपीजीआई रोड के नीचे लंबी सुरंग का निर्माण करना पड़ सकता है. वहीं गोमती रिवरफ्रंट के पास स्टेशन बनाने की स्थिति में भूमिगत पाइपलाइन, बिजली और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं को स्थानांतरित करने की जरूरत पड़ सकती है. इन कारणों से इन विकल्पों को अपेक्षाकृत जटिल माना जा रहा है.