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औरैया में पानी बचाने की बड़ी पहल, 24 लाख रुपये से बनेंगे 5 रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम

औरैया में भूजल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 24 लाख रुपये की लागत से पांच रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जाएंगे. परियोजना के तहत सरकारी भवनों की छतों से वर्षा जल को रिचार्ज पिट तक पहुंचाकर भूजल स्तर बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
औरैया में पानी बचाने की बड़ी पहल, 24 लाख रुपये से बनेंगे 5 रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
Courtesy: Chatgpt (Representative images)

औरैया: उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में गिरते भूजल स्तर को सुधारने और वर्षा जल का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है. शासन के निर्देश पर नगर पालिका क्षेत्र में 24 लाख रुपये की लागत से पांच रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित किए जाएंगे. इस परियोजना का उद्देश्य वर्षा जल को सीधे जमीन में पहुंचाकर भूजल का रिचार्ज करना और भविष्य में पानी की कमी की समस्या को कम करना है.

भूजल योजना सप्ताह के तहत जिलाधिकारी बृजेश कुमार के निर्देश पर इस योजना को अमल में लाया जा रहा है. नगर पालिका ने इसके लिए पांच स्थानों का चयन किया है. इनमें नगर पालिका परिसर, तहसील, शहीद पार्क, जिला कोषागार और एक अन्य सरकारी परिसर शामिल हैं. सबसे पहले जिला कोषागार में रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाने का काम शुरू कर दिया गया है.

नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी ने क्या बताया?

नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी सुभाष कुमार ने बताया कि चयनित भवनों की छतों पर गिरने वाले वर्षा जल को पाइपलाइन के माध्यम से रिचार्ज पिट तक पहुंचाया जाएगा. इसके बाद पानी जमीन में समाकर भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद करेगा. उन्होंने बताया कि परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और ठेकेदार ने निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया है. जिला कोषागार परिसर में बोरिंग का कार्य जारी है.

अधिशासी अधिकारी के अनुसार सरकारी भवनों में रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित होने के बाद आम लोगों को भी अपने घरों और भवनों में ऐसी व्यवस्था अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा. इससे जल संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देने में मदद मिलेगी.

विशेषज्ञों का क्या है मानना?

विशेषज्ञों का मानना है कि रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के जरिए बारिश का पानी व्यर्थ बहने के बजाय जमीन में जाएगा. इससे हैंडपंप और बोरवेल का जल स्तर सुधरेगा तथा गर्मियों के दौरान पानी की किल्लत कम होगी. इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति बेहतर होगी और जलभराव की समस्या में भी कमी आएगी.

भूजल स्तर बढ़ने से पेड़-पौधों, हरित क्षेत्र और खेती को भी लाभ मिलेगा. प्रशासन का मानना है कि यदि लोग भी अपने घरों और संस्थानों में वर्षा जल संचयन को अपनाते हैं तो आने वाले वर्षों में जल संकट से काफी हद तक राहत मिल सकती है. यह पहल जल संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.