उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश को वर्ष 2027 तक बाल श्रम मुक्त बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है. इस दिशा में जनजागरूकता बढ़ाने और समाज को बच्चों के अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा.
राजधानी लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल होंगे. सरकार का मानना है कि बाल श्रम केवल एक सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य और उनके अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा है. ऐसे में इसे समाप्त करने के लिए सरकारी प्रयासों के साथ-साथ समाज की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है.
श्रम एवं सेवायोजन विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बाल श्रम के खिलाफ व्यापक जनजागरूकता पैदा करना है. कार्यक्रम में बच्चों के शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और समग्र विकास से जुड़े अधिकारों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी. इसके साथ ही लोगों को यह बताया जाएगा कि बाल श्रम बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर किस प्रकार प्रतिकूल प्रभाव डालता है. विशेषज्ञों द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के महत्व और बच्चों को विद्यालयों से जोड़ने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला जाएगा.
प्रदेश सरकार का लक्ष्य केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि बाल श्रम उन्मूलन अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप देना भी है. कार्यक्रम के दौरान नागरिकों, सामाजिक संगठनों, शिक्षकों और अभिभावकों से इस मुहिम में सक्रिय सहयोग की अपील की जाएगी. अधिकारियों का कहना है कि जब तक समाज बाल श्रम के खिलाफ एकजुट होकर आवाज नहीं उठाएगा, तब तक इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं होगा. इसलिए वर्ष 2027 तक बाल श्रम मुक्त उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जनसहभागिता को विशेष महत्व दिया जा रहा है.
कार्यक्रम में बाल श्रम निषेध से संबंधित विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी भी दी जाएगी. लोगों को बताया जाएगा कि बाल श्रम कराना कानूनन अपराध है और इसके लिए कठोर दंड का प्रावधान किया गया है. साथ ही बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं एवं कार्यक्रमों के बारे में भी जानकारी साझा की जाएगी. इससे आम लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और बाल श्रम के मामलों की पहचान तथा रोकथाम में मदद मिलेगी.