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यूपी में धांधली की भेंट चढ़ी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया, गड़बड़ी के चलते परीक्षा हुई रद्द

उत्तर प्रदेश में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा धांधली के चलते रद्द कर दी गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश के बाद हजारों अभ्यर्थियों की उम्मीदें फिर से अटक गईं. अब परीक्षा दोबारा कराने के निर्देश दिए गए हैं.

Kanhaiya Kumar Jha
यूपी में धांधली की भेंट चढ़ी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया, गड़बड़ी के चलते परीक्षा हुई रद्द
Courtesy: Gemini AI

लखनऊ: लंबी तैयारी, परीक्षा और फिर रिजल्ट के बाद इंटरव्यू का इंतजार. लेकिन जब नौकरी की उम्मीद बंधे, तभी सब कुछ रद्द हो जाए. उत्तर प्रदेश में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा के साथ हजारों अभ्यर्थियों के साथ यही हुआ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को अप्रैल 2025 में हुई इस परीक्षा को अनियमितताओं और धांधली की पुष्टि के बाद निरस्त कर दिया. इस फैसले ने राज्यभर के उम्मीदवारों को फिर से अनिश्चितता में डाल दिया है.

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 33 विषयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 910 पदों के लिए भर्ती निकाली थी. इस बहाली को लेकर युवाओं में काफी उत्साह था. एक लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था. 16 और 17 अप्रैल 2025 को राज्य के 52 परीक्षा केंद्रों पर लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी. परीक्षा के बाद रिजल्ट आया और अभ्यर्थी इंटरव्यू की तैयारी में जुट गए थे.

धांधली की शिकायतों से बढ़ा संदेह

परीक्षा के कुछ ही दिनों बाद अनियमितताओं और अवैध धन वसूली की शिकायतें सामने आने लगीं. अभ्यर्थियों और अन्य स्रोतों से मिली जानकारियों ने परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए. इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे मामले की गोपनीय जांच के आदेश दिए. इसके बाद जांच एजेंसियां सक्रिय हुईं और परीक्षा की प्रक्रिया की गहराई से पड़ताल शुरू की गई.

एसटीएफ की कार्रवाई और गिरफ्तारियां

जांच के दौरान एसटीएफ ने 20 अप्रैल को एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया. असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा का फर्जी प्रश्नपत्र बनाकर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाले गिरोह के तीन आरोपियों महबूब अली, वैजनाथ पाल और विनय पाल को गिरफ्तार किया गया. पूछताछ में सामने आया कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र अवैध तरीके से निकाले गए थे और इसके बदले मोटी रकम वसूली जा रही थी.

आयोग के अंदर तक पहुंचा मामला

जांच में यह तथ्य और गंभीर हो गया जब पता चला कि आरोपी महबूब अली, तत्कालीन आयोग अध्यक्ष का गोपनीय सहायक था. उसी के जरिए प्रश्नपत्र लीक किए गए. निष्पक्षता बनाए रखने के लिए तत्कालीन आयोग अध्यक्ष से त्यागपत्र भी लिया गया. एसटीएफ की डेटा एनालिसिस और पूछताछ में यह पूरी तरह साबित हो गया कि परीक्षा प्रक्रिया के दौरान बड़े स्तर पर धांधली हुई थी.

परीक्षा रद्द, दोबारा आयोजन के निर्देश

इन सभी तथ्यों के आधार पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को निरस्त करने का आदेश दिया. उन्होंने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देश दिए कि परीक्षा का दोबारा आयोजन जल्द से जल्द किया जाए. साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि नई परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और सुरक्षित तरीके से हो. अब अभ्यर्थियों को एक बार फिर तैयारी और नए शेड्यूल का इंतजार करना होगा.